नयी दिल्ली, 14 अप्रैल (भाषा) महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण संबंधी संविधान संशोधन विधेयक में लोकसभा की उन सीटों की सटीक संख्या निर्दिष्ट नहीं की गई है जिन्हें मौजूदा 543 से बढ़ाया जाना है। इसमें कहा गया है कि कुल सदस्य 850 से ‘‘अधिक नहीं’’ होने चाहिए, और अंतिम संख्या परिसीमन आयोग द्वारा तय की जाएगी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सीटों का आवंटन आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर होगा और इस फार्मूले से दक्षिणी राज्यों को लाभ मिलने की संभावना है।
सीटों की अंतिम संख्या परिसीमन आयोग द्वारा निर्धारित की जाएगी, इसलिए विधेयक में सीटों की सटीक संख्या निर्दिष्ट नहीं की गई है, बल्कि केवल यह कहा गया है कि लोकसभा में राज्यों से प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से निर्वाचित ‘‘815 से अधिक सदस्य’’ और केंद्र शासित प्रदेशों से ‘‘35 से अधिक सदस्य’’ नहीं होंगे।
सूत्रों ने बताया, ‘‘850 का आंकड़ा लोकसभा सीटों की कुल संख्या की केवल ऊपरी सीमा को दर्शाता है।’’
वर्ष 2011 की जनगणना को आधार माना जाएगा और दक्षिणी राज्यों में अधिक प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण के कारण उन्हें सीटों के आवंटन में उत्तरी राज्यों की तुलना में तुलनात्मक लाभ मिल सकता है, जहां जनसंख्या वृद्धि अधिक रही है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लोकसभा में विधेयक पर बोलेंगे और सरकार द्वारा उठाए गए ‘‘ऐतिहासिक’’ कदम के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी चर्चा में भाग लेंगे।
लोकसभा में 16 और 17 अप्रैल को चर्चा और मतदान होगा। तीन विधेयकों- संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर चर्चा के लिए कुल 18 घंटे का समय आवंटित किया गया है।
राज्यसभा में 18 अप्रैल को चर्चा और मतदान होगा। कार्यवाही के लिए 10 घंटे की अवधि निर्धारित की गई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए चुनाव 16 और 17 अप्रैल को होगा।
भाषा आशीष नरेश
नरेश