अचानक आई बाढ़ के बाद रिश्तेदारों को लेकर चिंता, पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पा रहे: नेपाल के छात्र

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अचानक आई बाढ़ के बाद रिश्तेदारों को लेकर चिंता, पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पा रहे: नेपाल के छात्र

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 04:18 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 04:18 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नेपाल के छात्र विकास लगातार अपने मोबाइल फोन पर अपने देश से आ रही खबरें देख रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अचानक आई विनाशकारी बाढ़ के बाद वह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।

विकास ने कहा, ‘‘मैं पढ़ाई पर ध्यान नहीं लगा पा रहा हूं। काठमांडू में मेरा परिवार सुरक्षित है लेकिन मेरे कुछ रिश्तेदार प्रभावित इलाके की सीमा के पास रहते हैं और हम उनके लिए चिंतित हैं।’’

भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ ने तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिलों को प्रभावित किया है। बाढ़ का पानी नुवाकोट और चितवन तक फैल गया, जिससे कम से कम चार स्थायी पुल और कई अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए।

कई विद्यार्थियों ने बताया कि काठमांडू में उनके परिवार सुरक्षित हैं लेकिन प्रभावित इलाकों के आसपास रहने वाले रिश्तेदारों को लेकर वे चिंतित हैं। वे अपने परिवारों से मिलने वाली जानकारी के जरिए वहां की स्थिति पर नजर रख रहे हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले नेपाल के छात्र सुयोग बंसल ने कहा, ‘‘मेरा परिवार काठमांडू में रहता है, इसलिए वे सुरक्षित हैं। लेकिन मेरे कुछ रिश्तेदार उस इलाके की सीमा के पास रहते हैं, जहां बाढ़ आई है। वे सीधे प्रभावित क्षेत्र में नहीं हैं लेकिन स्थिति अनिश्चित होने के कारण हम चिंतित हैं।’’

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पढ़ाई कर रही छात्रा नित्या ने बताया कि काठमांडू में रह रहे उसके परिवार ने उसे जानकारी दी है कि उसके भाई का एक दोस्त लापता है और वे उससे संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे भाई का दोस्त बाढ़ प्रभावित इलाके के पास गया था और मेरे भाई ने बताया कि वह उससे संपर्क नहीं कर पा रहा है। काठमांडू में मेरा परिवार उसके परिवार के संपर्क में है और मुझे लगातार जानकारी दे रहा है। हम सभी चिंतित हैं क्योंकि हमें नहीं पता कि स्थिति क्या है।’’

विद्यार्थियों ने कहा कि घर से दूर होने के कारण स्थिति और मुश्किल हो गई है, खासकर तब जब उन्हें जानकारी के लिए फोन कॉल और संदेशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

विकास ने कहा, ‘‘जब भी बाढ़ की खबर आती है, मैं सबसे पहले अपने परिवार को फोन करता हूं। वे बताते हैं कि सभी लोग ठीक हैं, लेकिन जब आपको पता हो कि आपके रिश्तेदार प्रभावित इलाके के पास रह रहे हैं, तो पढ़ाई पर ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है।’’

एक छात्र ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में नेपाल के छात्र एक-दूसरे का हालचाल पूछ रहे हैं और स्थिति पर चर्चा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हममें से ज्यादातर के परिवार नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में हैं, जो प्रभावित नहीं हुए हैं लेकिन कई छात्रों के रिश्तेदार प्रभावित इलाकों में भी रहते हैं। हम लगातार एक-दूसरे के साथ जानकारी साझा कर रहे हैं और यह पता कर रहे हैं कि सभी सुरक्षित हैं या नहीं। भले ही हमारे अपने परिवार प्रभावित न हुए हों, लेकिन अपने देश में ऐसी घटना होने से हम स्वाभाविक रूप से चिंतित हैं। सोशल मीडिया पर बाढ़ में लोगों के बह जाने के वीडियो देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।’’

भाषा जितेंद्र मनीषा

मनीषा