फेसबुक से प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाने को लेकर जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए:आईटी समिति प्रमुख

फेसबुक से प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाने को लेकर जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए:आईटी समिति प्रमुख

फेसबुक से प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो हटाने को लेकर जुकरबर्ग को माफी मांगनी चाहिए:आईटी समिति प्रमुख
Modified Date: August 3, 2026 / 08:52 pm IST
Published Date: August 3, 2026 8:52 pm IST

नयी दिल्ली, तीन अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने के मामले में, संसद की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने सोमवार को कहा कि मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को इस घटना के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए, जबकि समिति के कई अन्य सदस्यों ने जवाबदेही तय कर कानूनी कार्रवाई की भी मांग की।

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, समिति में शामिल विपक्षी दलों के सांसदों ने कहा कि सोशल मीडिया पर असहमति के लिए पर्याप्त गुंजाइश होनी चाहिए और सरकार विरोधी सामग्री को राष्ट्रविरोधी नहीं माना जाना चाहिए।

समिति की तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक के बाद दुबे ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेटा ने खुद स्वीकार किया है कि प्रधानमंत्री का वीडियो रात 12:30 बजे से सुबह पांच बजे तक, यानी करीब पांच घंटे तक प्लेटफॉर्म (फेसबुक) पर अनुपलब्ध रहा। यह बेहद गंभीर मामला है और इस पर मार्क जुकरबर्ग की ओर से व्यक्तिगत माफी आनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि यदि जुकरबर्ग माफी नहीं मांगते हैं तो सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 79 के तहत मेटा को प्राप्त ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। इस प्रावधान के तहत सोशल मीडिया नेटवर्क और इंटरनेट सेवा प्रदाता अपने प्लेटफॉर्म पर तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) की सामग्री के लिए कानूनन जिम्मेदार नहीं होते।

यह पूछताछ, प्रधानमंत्री मोदी के एक हालिया फेसबुक पोस्ट पर कुछ समय के लिए रोक लगा देने की घटना के बाद हुई है। पोस्ट में उन्होंने भारत के युवाओं को संबोधित किया था और प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख़्त कार्रवाई का वादा किया था।

इस घटना को लेकर सरकार ने मेटा के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया था।

संसदीय समिति ने सोमवार को मेटा से कहा कि वह 10 दिनों के अंदर लिखित रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करे।

दुबे ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब मेटा ने कोई वीडियो हटाया है। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘2024 में मार्क जुकरबर्ग ने संसदीय चुनाव के नतीजों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनकी मानसिकता देश को अस्थिर करने की है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का वीडियो पांच घंटे के लिए हटाया गया। वे (जुकरबर्ग) गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देशों का भी पालन नहीं करते। इसलिए मैं फिर से कहता हूं कि मार्क जुकरबर्ग को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो हटाने के मामले में व्यक्तिगत रूप से माफी मांगनी चाहिए।’’

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान समिति के सदस्यों ने कहा कि मेटा भारत से मोटी कमाई करता है, लेकिन देश के कानूनों का पालन नहीं करता।

सदस्यों ने मेटा अधिकारियों से ‘एल्गोरिदम बायस’ के मुद्दे पर भी सवाल किए। उनका कहना था कि बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहती है, जबकि ‘‘वास्तविक’’ और वैध सामग्री हटा दी जाती है।

‘एल्गोरिदम बायस’ उस वक्त होता है जब कंप्यूटर प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) गलत, भेदभावपूर्ण या पक्षपाती नतीजे देते हैं।

एक सांसद ने मेटा के प्रतिनिधियों से पूछा कि जब फेसबुक ने कई आपत्तिजनक सामग्री को नहीं हटाया, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वीडियो प्लेटफॉर्म से किसने हटाया।

सूत्रों ने समिति के सदस्य को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘इसके लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार है?’’

हालांकि, अमेरिकी सोशल मीडिया कंपनी ने इस घटना के लिए तकनीकी खराबी को वजह बताया और माफी मांगी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को यह सफाई ‘‘अपर्याप्त’’ लगी। कंपनी ने कहा था कि सामग्री ‘‘गलती से’’ हटायी गयी थी और उसे प्लेटफ़ॉर्म पर फिर से बहाल कर दिया गया।

सोमवार को हुई बैठक में एक और सदस्य ने कहा कि लोकतंत्र में, ‘‘अगर प्रधानमंत्री का वीडियो सुरक्षित नहीं है, तो जवाबदेही तय की जानी चाहिए।’’

सदस्यों ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘डीपफेक’ की पहचान करने के लिए बनाए गए एल्गोरिदम की दक्षता पर भी सवाल उठाए।

सूत्रों के मुताबिक, मेटा के अधिकारियों ने समिति के समक्ष इस घटना को लेकर खेद जताया और कहा कि वे माफी मांगने को तैयार हैं।

हालांकि, भाजपा के एक सांसद ने कहा कि मामला सिर्फ माफ़ी मांगने तक सीमित नहीं है। सांसद ने कहा कि इस मामले में जवाबदेही तय की जानी चाहिए और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने ‘सोशल और डिजिटल प्लेटफॉर्म तथा उनके विनियमन’ विषय पर चर्चा के लिए बैठक की।

यह बैठक सरकार द्वारा मेटा की ‘ग्लोबल टीम’ को, प्रधानमंत्री मोदी के फेसबुक पोस्ट पर कुछ समय के लिए रोक लगाने की घटना को लेकर तलब किये जाने के कुछ दिन बाद हुई है।

केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन तथा सोशल और डिजिटल मीडिया मंचों – स्नैपचैट, गूगल, एक्स (पहले ट्विटर), मेटा (फेसबुक, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम) और यूट्यूब – के प्रतिनिधि समिति के समक्ष पेश हुए।

भाषा सुभाष अविनाश

अविनाश


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