Actress Sowcar Janaki Death: सिनेमा जगत को एक और बड़ा झटका, इस मशहूर अभिनेत्री का निधन, चेन्नई के अस्पताल में चल रहा था इलाज

सिनेमा जगत को एक और बड़ा झटका, इस मशहूर अभिनेत्री का निधन, चेन्नई के अस्पताल में चल रहा था इलाज। Actress Sowcar Janaki Death

Actress Sowcar Janaki Death: सिनेमा जगत को एक और बड़ा झटका, इस मशहूर अभिनेत्री का निधन, चेन्नई के अस्पताल में चल रहा था इलाज
Modified Date: August 21, 2026 / 06:08 pm IST
Published Date: August 21, 2026 6:08 pm IST

चेन्नई। Actress Sowcar Janaki Death तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाने वाली दिग्गज अभिनेत्री सौकार जानकी का निधन हो गया। वह 94 वर्ष की थीं। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उनका चेन्नई के एक अस्पताल में इलाज चल रहा था। उन्हें हाल ही में आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस ली।

अभिनेत्री के निधन की पुष्टि नादिगर संगम के अध्यक्ष और अभिनेता नासर ने की। उन्होंने 21 अगस्त को जारी एक बयान में सौकार जानकी के निधन की जानकारी दी। बयान के मुताबिक, अभिनेत्री का निधन शुक्रवार दोपहर 1:59 बजे हुआ। नासर ने बताया कि सौकार जानकी का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए शाम 5 बजे से सेंटोफ रोड, तेयनाम्पेट में रखा जाएगा। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद दक्षिण भारतीय फिल्म जगत में शोक की लहर है।

सौकार जानकी का करियर (Actress Sowcar Janaki Death)

Actress Sowcar Janaki Death बहरहाल, सौकार जानकी के करियर के बारे में बात की जाए तो उन्होंने साल 1950 में तेलुगु फिल्म ‘शावुकरु’ से करियर की शुरुआत की थी। इसका निर्देशन एलवी प्रसाद ने किया है। उन्होंने तमिल में साल 1952 में वलयपति से डेब्यू किया था। उन्होंने अपने करियर में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में काम किया है। 1959 में एक्ट्रेस ने डॉ राजकुमार के साथ कन्नड़ सिनेमा की पहली पैन इंडिया फिल्म में काम किया था। इस फिल्म का टाइटल ‘महिषासुर मर्दिनी’ था।

इन्हें भी पढ़ें:-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।