Vijaya Mehta Passed Away: दिग्गज कलाकार का निधन, 92 साल की उम्र दुनिया को कहा अलविदा, ‘बाई’ के नाम से थीं मशहूर, अनुपम खेर ने दी श्रद्धांजलि

दिग्गज रंगमंच निर्देशक विजया मेहता का 92 वर्ष की उम्र में निधन

Vijaya Mehta Passed Away: दिग्गज कलाकार का निधन, 92 साल की उम्र दुनिया को कहा अलविदा, ‘बाई’ के नाम से थीं मशहूर, अनुपम खेर ने दी श्रद्धांजलि

Vijaya Mehta Passed Away | Photo Credit: AI

Modified Date: July 1, 2026 / 07:57 am IST
Published Date: July 1, 2026 7:57 am IST
HIGHLIGHTS
  • विजया मेहता का निधन
  • मंगलवार रात 92 वर्ष की उम्र में निधन
  • दक्षिण मुंबई स्थित अपने आवास पर ली अंतिम सांस

मुंबई: Vijaya Mehta Passed Away भारतीय रंगमंच की दिग्गज निर्देशक और अभिनेत्री विजया मेहता का मंगलवार रात उम्र संबंधी बीमारियों के कारण निधन हो गया। वह 92 वर्ष की थीं। मराठी रंगमंच (Marathi Theatre) को नई दिशा देने में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है। जाने-माने अभिनेता विजय केंकरे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि ‘बाई’ के नाम से जानी जाने वाली मेहता का दक्षिण मुंबई स्थित उनके आवास पर निधन हो गया।

Vijaya Mehta Death केंकरे ने कहा, ‘उनका निधन रात करीब 9:30 से 10 बजे के बीच हुआ। मुझे उनकी बेटी के जरिये उनके निधन की जानकारी मिली। यह मेरी व्यक्तिगत क्षति है। वह मेरी गुरु रही हैं।’ केंकरे ने इस दिग्गज फिल्म निर्माता के 90 के दशक के टीवी धारावाहिक ‘लाइफलाइन’ में मुख्य सहायक के रूप में काम किया था और कई अन्य परियोजनाओं पर भी उनके साथ करीबी से जुड़े रहे थे।

एक फिल्म निर्माता के रूप में, उन्होंने ‘राव साहब’ (1986) और ‘पेस्टनजी’ (1988) जैसी हिंदी भाषा की स्वतंत्र (इंडी) फिल्मों का निर्देशन किया, और इन दोनों ही फिल्मों को काफी सराहना मिली। केंकरे ने कहा, ‘वह बेहतरीन निर्देशकों में से एक थीं, वह हर काम को बेहद बारीकी से करने वाली इंसान थीं। वह सचमुच महान थीं।’ अभिनय के क्षेत्र में विजया मेहता ने गोविंद निहलानी की 1984 की फिल्म ‘पार्टी’ में भी काम किया था। उनके परिवार में एक बेटी और दो बेटे हैं।

अनुपम खेर ने विजया मेहता को दी श्रद्धांजलि

विजया मेहता – एक महान हस्ती! विजया मेहता के गुज़र जाने की खबर सुनकर बहुत दुख हुआ। भारत की बेहतरीन थिएटर हस्तियों में से एक, एक शानदार फ़िल्ममेकर और सबसे बढ़कर, एक कमाल की इंसान। मुझे ‘राव साहब’ और ‘पेस्टोनजी’ में विजया बाई के साथ काम करने का सौभाग्य मिला। तब तक मैं कुछ फ़िल्में कर चुका था और सोचता था कि मुझे एक्टिंग के बारे में कुछ समझ है। लेकिन उनके साथ हुई हर रिहर्सल ने मुझे याद दिलाया कि यह कला कितनी विशाल है। उनकी समझदारी, इंसानी व्यवहार की उनकी परख और उनकी असाधारण संवेदनशीलता के सामने, मैं खुशी-खुशी फिर से एक स्टूडेंट बन गया। उन्होंने कभी अपना ज्ञान थोपा नहीं, बल्कि उसे रोशन किया। उन्होंने कभी आवाज़ ऊँची नहीं की, बल्कि आपके स्टैंडर्ड को ऊँचा उठाया। उनका अनुशासन शालीनता से, अपनापन विनम्रता से और उनकी काबिलियत सादगी से झलकती थी। मौत की सबसे क्रूर बात यह है कि खबर सुनते ही, हमें किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में ‘भूतकाल’ (past tense) में बात करने के लिए मजबूर होना पड़ता है जिसे हम प्यार करते हैं। दिमाग को जो बात पता चलती है, उसे दिल को मानने में बहुत ज़्यादा समय लगता है। विजया बाई, आपकी दरियादिली, आपके प्यार, आपके मार्गदर्शन और हममें से बहुतों को यह याद दिलाने के लिए धन्यवाद कि एक्टिंग सिर्फ़ परफ़ॉर्म करना नहीं है। बल्कि ज़िंदगी को समझना है। आप उन अनगिनत एक्टर्स, डायरेक्टर्स और स्टूडेंट्स के बीच हमेशा मौजूद रहेंगी जिनकी ज़िंदगी को आपने छुआ। ओम शांति।

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