“सरकार एक लाइन से डर रही है…” राहुल गांधी की किताब वाली बहस से संसद ठप, डोकलाम पर घमासान की पूरी कहानी

Ads

Rahul Gandhi cited an alleged unpublished memoir of former Army chief MM Naravane in Lok Sabha, triggering sharp objections from Rajnath Singh and Amit Shah. The exchange escalated into a major disruption over rules, national security, and the Doklam standoff.

  •  
  • Publish Date - February 2, 2026 / 05:34 PM IST,
    Updated On - February 2, 2026 / 05:34 PM IST

Image Source: ANI

संसद में अचानक क्यों भड़का तूफान?

लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा चल रही थी। माहौल सामान्य था — जब तक नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खड़े नहीं हुए। कुछ ही मिनटों में सदन का स्वर बदल गया। राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए चीन और डोकलाम से जुड़ा संदर्भ पढ़ना चाहा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तुरंत खड़े हो गए। उनका सवाल छोटा था, लेकिन असर बड़ा:

“जिस किताब का जिक्र किया जा रहा है, क्या वह प्रकाशित हुई है?”

यहीं से संसद में ऐसा टकराव शुरू हुआ जिसने पूरे दिन की कार्यवाही रोक दी।

विवाद की जड़: तेजस्वी सूर्या का हमला

इस बहस की शुरुआत राहुल गांधी से पहले हुई थी। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने यूपीए सरकार पर हमला बोलते हुए कहा:

“यूपीए के दस साल पॉलिसी पैरालिसिस के दस साल थे।”

उन्होंने राष्ट्रपति के पुराने अभिभाषणों का हवाला देते हुए दावा किया कि आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद से निपटने में मौजूदा सरकार ने निर्णायक कार्रवाई की है। कांग्रेस सांसदों ने विरोध किया। राहुल गांधी ने जवाब देने के लिए खड़े होकर कहा कि कांग्रेस की देशभक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।

राहुल गांधी क्या पढ़ना चाहते थे?

राहुल गांधी ने दावा किया कि पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे की आत्मकथा में 2020 के भारत-चीन गतिरोध और डोकलाम की स्थिति का उल्लेख है। उन्होंने कहा:

“ध्यान से सुनिए… इससे पता चलेगा कौन देशभक्त है।”

राहुल का आरोप था कि चीनी टैंक भारतीय पोज़िशन के बेहद करीब पहुंच गए थे। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है और देश को सच जानना चाहिए।

जैसे ही उन्होंने कथित अंश पढ़ना शुरू किया, सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज किया।

सरकार की आपत्ति: नियम बनाम बयान

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा:

“अगर किताब प्रकाशित नहीं हुई है तो उसका उल्लेख सदन में नहीं किया जा सकता।”

गृह मंत्री अमित शाह ने जोड़ा:

“सदन में प्रमाणिक और प्रकाशित स्रोत ही रखे जा सकते हैं।”

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट कहा:

“संसद नियमों से चलती है, बिना छपी किताब का हवाला व्यवस्था के खिलाफ है।”

सरकार का तर्क साफ था — अप्रमाणित सामग्री संसद के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बन सकती।

स्पीकर का हस्तक्षेप: “सदन नियमों से चलेगा”

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार राहुल गांधी को रोका। उन्होंने कहा:

“अप्रकाशित किताब या अखबार की कटिंग को कोट नहीं किया जा सकता।”

स्पीकर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण तक चर्चा सीमित रखने को कहा। लेकिन राहुल गांधी अड़े रहे।

राहुल गांधी का पलटवार: “सरकार डर रही है”

राहुल गांधी ने सदन के भीतर कहा:

“मुझे बस दो लाइन बोलनी हैं, ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।”

सदन के बाहर उन्होंने आरोप लगाया:

“सरकार एक लाइन से डर रही है… सच सामने आने से रोका जा रहा है।”

राहुल ने दावा किया कि संबंधित किताब को जानबूझकर प्रकाशित नहीं होने दिया गया।

अखिलेश यादव का समर्थन

समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव राहुल गांधी के समर्थन में खड़े हुए। उन्होंने कहा:

“चीन का मुद्दा संवेदनशील है, विपक्ष को बोलने देना चाहिए।”

उनका तर्क था कि राष्ट्रीय सुरक्षा लोकतांत्रिक बहस से बाहर नहीं हो सकती।

हंगामा इतना बढ़ा कि कार्यवाही स्थगित

लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा की कार्यवाही पहले स्थगित हुई, फिर दोबारा शुरू हुई, और बाद में फिर रोकनी पड़ी। बाहर निकलते हुए राहुल गांधी ने कहा:

“मैं फिर बोलूंगा।”

संसद परिसर में भी बयानबाजी जारी रही।

डोकलाम पर असली दावा क्या था?

राहुल गांधी का मुख्य दावा था कि डोकलाम के दौरान चीनी टैंक भारतीय सीमा के बेहद करीब पहुंच गए थे। उन्होंने इसे नरवणे के संस्मरण और एक मैगज़ीन लेख से जोड़ते हुए पढ़ना चाहा।

सरकार ने इसे अप्रमाणित बताते हुए रोक दिया।

यही विवाद का केंद्र बन गया।

यह भी पढ़ें