Who is MM Naravane? : Photo Credit: IBC24
नई दिल्ली: आज संसद के बजट सत्र का चौथा दिन है। कल जहां केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यूनियन बजट पेश किया तो आज चौथे दिवस राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की जानी थी। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव पर लोकसभा में 18 और राज्यसभा में 16 घंटे का समय तय किया गया है। वही इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए आज राहुल गांधी ने जैसे ही बोलना शुरू किया तो संसद में बवाल में मच गया।
दरअसल, यह हंगामा तब हुआ जब राहुल गांधी ने लोकसभा में जब पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के अंश पढ़ने शुरू किए। इस दौरान उन्हें स्पीकर ने रोक दिया। इसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष में हंगामा शुरू हो गया। जिसके बाद सदन की कार्यवाही रोकनी पड़ी।
राहुल गांधी ने कहा कि ये कहते हैं कि हम टेररिज्म से लड़ते हैं, एक तथ्य से डरते हैं। उसमें ऐसा क्या है, जिसे हम पढ़ नहीं सकते। हमें पढ़ने दीजिए ना। इसमें वह पूरी बात है कि डोकलाम में क्या हु्आ था। जो कह रहा हूं, उसकी जिम्मेदारी लेता हूं। उन्होंने कहा कि नरवणे जी ने लिखा है। इस पर फिर हंगामा शुरू हो गया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि नरवणे को अगर लगता था कि रोक गलत लगाई गई है, तो वे कोर्ट जा सकते थे। वह कोर्ट क्यों नहीं गए। राहुल गांधी ने कहा कि चीन के टैंक्स कैलाश रिज पर आ रहे थे। इस पर फिर हंगामा हुआ। राजनाथ ने कहा कि विपक्ष के नेता सदन को गुमराह करने की कोशिश ना करें।
जनरल मनोज मुकुंद नरवाणे भारतीय थलसेना के 27वें सेना प्रमुख थे। जिन्होंने दिसंबर 2019 से अप्रैल 2022 तक भारत के सेना प्रमुख के रूप में कार्य किया, जिसमें 2020 के भारत-चीन सीमा संघर्ष भी शामिल हैं। उन्होंने पूर्वी लद्दाख, डोकलाम (2017) और कई अन्य ऑपरेशन्स में अहम भूमिका निभाई। अब उनकी अप्रकाशित किताब पर घमासान मचा हुआ है।
आपको बता दें कि जनरल नरवणे ने चार दशकों तक सेना की शानदार और सराहनीय सेवा की। जब वह रिटायर हुए तो उनकी सेवानिवृत्ति पर सरकार ने नोट जारी किया, जनरल नरवणे को कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय सेना के कर्मियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने, पूर्वी लद्दाख में उत्तरी शत्रु को दृढ़ता से जवाब देने और आत्मनिर्भरता की दिशा में दृढ़ प्रयास करने के साथ-साथ भविष्य के युद्धों से लड़ने के लिए विशिष्ट और विघटनकारी प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए याद किया जाएगा।
जनरल नरवाणे की आत्मकथा का नाम है – फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी। इस किताब के प्रकाशक पेंग्विन रेंडम हाउस हैं। ये किताब 2023-24 में प्रकाशित होने वाली थी, लेकिन ये अब तक अप्रकाशित है। इस किताब में मिलिट्री ऑपरेशन्स और सरकारी नीतियों के बारे में किए गए खुलासों पर केंद्रित है। जिसके कारण सरकार ने इसकी समीक्षा करवाई और इसके पब्लिकेशन में देरी हुई।
किताब में नरवणे ने हाई-लेवल फैसले लेने की प्रक्रिया का विस्तार से ज़िक्र किया है, जिससे रिटायर अधिकारियों द्वारा खुलासे करने के नियमों का संभावित उल्लंघन करने के लिए उनकी आलोचना हो रही है।