पटना, दो फरवरी (भाषा) बिहार में बैंक राज्य के लोगों को ऋण देने के मामले में पहले की तुलना में अधिक उदार हो रहे हैं, जिसके कारण राज्य के ऋण–जमा (सीडी) अनुपात में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है। 31 मार्च, 2025 को राज्य का सीडी अनुपात 53.50 प्रतिशत था, जो सितंबर, 2025 में बढ़कर 56.54 प्रतिशत हो गया। इस प्रकार छह महीनों के भीतर इसमें तीन प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। राज्य की आर्थिक समीक्षा में यह जानकारी दी गई है।
आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर, 2025 में बिहार के लिए बैंक समूह–वार आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें जमा, अग्रिम (राज्य के बाहर स्थित शाखाओं सहित) तथा ऋण–जमा अनुपात के विवरण शामिल हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल जमा राशि में सर्वाधिक 4,42,376 करोड़ रुपये तथा ऋण में 2,03,923 करोड़ रुपये का हिस्सा रहा। हालांकि, इनका ऋण–जमा अनुपात 46.10 प्रतिशत रहा।
निजी क्षेत्र के बैंकों ने कुल 91,600 करोड़ रुपये की जमा राशि जुटाई और 85,712 करोड़ रुपये का अग्रिम दिया, जिससे उनका ऋण–जमा अनुपात 93.57 प्रतिशत रहा। सहकारी बैंकों की जमा राशि 6,354 करोड़ रुपये तथा दी गई अग्रिम राशि 5,205 करोड़ रुपये रही, जिससे इनका ऋण–जमा अनुपात 81.93 प्रतिशत दर्ज किया गया।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की जमा राशि 48,372 करोड़ रुपये और अग्रिम 31,056 करोड़ रुपये होने से उनका ऋण–जमा अनुपात 64.20 प्रतिशत रहा। वहीं, लघु वित्त बैंकों ने 2,716 करोड़ रुपये की जमा राशि के मुकाबले 8,485 करोड़ रुपये का अग्रिम दिया, जिससे उनका ऋण–जमा अनुपात सर्वाधिक 312.39 प्रतिशत रहा।
कुल मिलाकर, 30 सितंबर, 2025 तक बिहार के बैंकिंग क्षेत्र में कुल जमा राशि 5,91,417 करोड़ रुपये और कुल अग्रिम 3,34,381 करोड़ रुपये रही, जिससे समग्र ऋण–जमा अनुपात 56.54 प्रतिशत दर्ज किया गया।
इसी अवधि में राज्य में बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की स्थिति में भी सुधार देखा गया है। हाल के वर्षों में एनपीए का अनुपात लगातार घटा है। यह 2020–21 में 11.8 प्रतिशत था, जो 2024–25 में घटकर 7.6 प्रतिशत रह गया।
भाषा कैलाश जितेंद्र अजय
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