Geeta Vishwas Shaktiman : वैज्ञानिक बनना चाहती थी यह टॉप एक्ट्रेस, पिता के गायब होने के बाद सड़कों पर आ गया था परिवार, पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां

90 के दशक के मशहूर टीवी शो 'शक्तिमान' में Vaishnavi Macdonald ने गीता विश्वास का किरदार निभाया। लेकिन पर्दे पर न्याय दिलाने वाली वैष्णवी की असल जिंदगी संघर्षों और मुश्किलों से भरी रही, जिसमें परिवार की आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियाँ शामिल थीं।

Geeta Vishwas Shaktiman : वैज्ञानिक बनना चाहती थी यह टॉप एक्ट्रेस, पिता के गायब होने के बाद सड़कों पर आ गया था परिवार, पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां

Geeta Vishwas Shaktiman / Image Source : X

Modified Date: February 21, 2026 / 11:52 pm IST
Published Date: February 21, 2026 11:50 pm IST
HIGHLIGHTS
  • वैष्णवी मैकडोनाल्ड का बचपन आर्थिक कठिनाइयों और पारिवारिक विवादों से भरा रहा।
  • माँ की आत्मघाती प्रवृत्ति और पिता के गायब होने के बावजूद उन्होंने अपनी मंजिल नहीं छोड़ी।
  • 1998 में ‘शक्तिमान’ में गीता विश्वास का किरदार निभाकर उन्होंने सफलता और प्रसिद्धि हासिल की।

एंटरटेनमेंट डेस्क : Geeta Vishwas Shaktiman  90 के दशक के मशहूर शो ‘शक्तिमान’ में निडर पत्रकार गीता विश्वास का किरदार निभाने वाली वैष्णवी मैकडोनाल्ड को आज भी हर घर में पहचाना जाता है। लेकिन पर्दे पर हमेशा दूसरों को न्याय दिलाने वाली वैष्णवी की असल जिंदगी बहुत संघर्षों भरी रही है। सफलता की ऊंचाइयों तक पहुँचने से पहले उन्होंने एक ऐसा समय भी देखा जब उनका परिवार दाने-दाने को मोहताज था।

संघर्षों से भरा बचपन और शिक्षा की बाधा

वैष्णवी मैकडोनाल्ड की प्रारंभिक जिंदगी माता-पिता के बीच आपसी झगड़ों और अहंकार की भेंट चढ़ गई, जिसके कारण उनकी पढ़ाई पर गहरा असर पड़ा। Geeta Vishwas Shaktiman   उन्होंने एक साक्षात्कार में खुलासा किया कि इन विवादों की वजह से उन्हें एक होटल से दूसरे होटल भटकना पड़ता था, जिससे वे स्कूल नहीं जा पाती थीं। हालांकि वह पढ़ाई में बहुत होनहार थीं और एक वैज्ञानिक बनने का सपना देखती थीं, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों ने उन्हें कहीं और ही मोड़ दिया।

पिता का लापता होना और मां का आत्मघाती कदम

जब उनका परिवार हैदराबाद में बसने की कोशिश कर रहा था, तभी उनके पिता अचानक बिना बताए गायब हो गए। आर्थिक तंगी और बेसहारा होने के कारण उनकी मां उन्हें लेकर मुंबई आ गईं, जहाँ हालात इतने बदतर हो गए कि उनके पास रहने और खाने तक के पैसे नहीं बचे। हताशा के उस दौर में उनकी मां ने खुदकुशी करने और अपनी दोनों बेटियों को जहर खिलाकर मारने का मन बना लिया था ताकि वे किसी गलत हाथ में न पड़ें।

चमत्कारिक अनुभव और ‘शक्तिमान’ की सफलता

वैष्णवी बताती हैं कि एक चर्च में हुए अलौकिक अनुभव ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, जहाँ उन्हें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दरवाजे पर ही चमत्कारिक रूप से पैसे मिले थे। बाद में वह अपने पिता से मिलीं, जिन्होंने धर्म परिवर्तन कर दूसरी शादी कर ली थी। फिल्म जगत की नकारात्मकता से तंग आकर उन्होंने टेलीविजन का रुख किया। उनकी मां को डर था कि इससे उनका करियर खत्म हो जाएगा, लेकिन शक्तिमान 1998 में गीता विश्वास के किरदार ने उन्हें घर-घर में एक आइकॉन बना दिया।

इन्हे भी पढ़ें:-

 

 


सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

I’m Sneha Singh, a journalist and storyteller committed to ethical, ground-level, and impact-oriented reporting. A Gold Medalist in Journalism & Mass Communication, I believe in telling stories with accuracy, sensitivity, and purpose. Currently working with IBC24, I specialize in content writing, news production, and modern storytelling bridging facts with human experiences to inform, engage, and inspire audiences..