मप्र में टीईटी अनिवार्यता से 1.50 लाख शिक्षक प्रभावित: कांग्रेस

मप्र में टीईटी अनिवार्यता से 1.50 लाख शिक्षक प्रभावित: कांग्रेस

मप्र में टीईटी अनिवार्यता से 1.50 लाख शिक्षक प्रभावित: कांग्रेस
Modified Date: September 1, 2026 / 09:28 pm IST
Published Date: September 1, 2026 9:28 pm IST

भोपाल, एक सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश में विपक्षी कांग्रेस ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने से करीब 1.50 लाख कार्यरत शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा करते हुए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव को मंगलवार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर उनका ध्यान आकर्षित किया है।

सिंघार ने पत्र में कहा कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के कारण उनकी सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को लेकर गंभीर एवं विषम स्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरे मामले से प्रदेश के करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं।’’

सिंघार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के फैसलों के परिप्रेक्ष्य में टीईटी का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है।

उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि टीईटी पास करना सभी नए शिक्षकों और पहले से सेवा में कार्यरत उन शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा, जो पदोन्नति चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई शिक्षक नई नियुक्ति या पदोन्नति चाहता है तो टीईटी उत्तीर्ण किए बिना उसका दावा स्वीकार्य नहीं होगा।

सिंघार ने इन फैसलों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘ऐसे में प्रदेश सरकार को शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।’’

नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। इसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने तथा उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण का प्रस्ताव पारित किया गया है।

उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्य अपने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से पहल कर सकते हैं, तो मध्यप्रदेश सरकार को भी शिक्षकों की समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए आगे आना चाहिए।

सिंघार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए, ताकि टीईटी से संबंधित समस्या पर व्यापक चर्चा हो सके और प्रदेश के करीब 1.50 लाख प्रभावित शिक्षकों तथा उनके परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जा सके।

भाषा

ब्रजेन्द्र रवि कांत


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