Bhopal Irani Dera: अपराधियों का आश्रय स्थल बना राजधानी का ईरानी डेरा! यहीं छिपकर बैठे थे देश के बड़े-बड़े क्रिमिनल, कब्जे से मिले सामान देखकर पुलिस के भी उड़े होश

Bhopal Irani Dera: अपराधियों का आश्रय स्थल बना राजधानी का ईरानी डेरा! यहीं छिपकर बैठे थे देश के बड़े-बड़े क्रिमिनल, कब्जे से मिले सामान देखकर पुलिस के भी उड़े होश

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  • Publish Date - January 6, 2026 / 11:37 PM IST,
    Updated On - January 6, 2026 / 11:45 PM IST

Bhopal Irani Dera | Photo Credit: IBC24 Customize

HIGHLIGHTS
  • भोपाल पुलिस ने 150 जवानों के साथ ईरानी डेरे पर दबिश दी
  • गिरोह फर्जी पहचान बनाकर लूट और ठगी करता था
  • गैंग का संचालन कबीलाई ढांचे और सरदार की पंचायत से होता था

भोपाल: Bhopal Irani Dera मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का ईरानी डेरा इन दिनों पूरे देश में सुर्खियों में है। यह वो डेरा है जहां पर खुद पुलिस भी जाने से डरती है, लेकिन इस बार पुलिस ने करीबन डेढ़ सौ के बल के साथ यहां अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई कर डाली। डेरे के अंदर का नजारा न सिर्फ हैरान करने वाला था बल्कि यहां से बरामद समान ने खुद पुलिस के भी होश फाख्ता कर दिए।

Bhopal Irani Dera दरअसल, मध्यप्रदेश की भोपाल पुलिस ने 27 और 28 दिसम्बर की दरमियानी रात में ईरानी डेरे में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस की गिरफ्त में आये यह लोग कोई आम अपराधी नहीं बल्कि देश के अलग अलग राज्यो में बड़े अपराधों को अंजाम देकर भोपाल के इस ईरानी डेरे में आकर फरारी काट रहे थे। पुलिस ने पुख्ता सूचना के बाद यहां 27 और 28 दिसम्बर की देर रात बड़ी कार्रवाई की। पुलिस अधिकारियों और करीबन डेढ़ सौ से ज्यादा बल के साथ पुलिस ने यहां दबिश दी।

पुलिस को यहां से न सिर्फ महंगी मोटरसाइकिल, डॉलर, रियाल, आईफोन मिले, बल्कि बड़ी संख्या में आईकार्ड भी पुलिस ने बरामद किए, जांच में सामने आया है कि आरोपी कभी खुद को CBI या पुलिस अधिकारी तो कभी सेल टैक्स, कस्टम अफसर कुछ मामलों में पत्रकार बताकर लोगों को डराते हैं और जांच या छापेमारी के नाम पर पैसे ऐंठ लेते हैं। इसके साथ ही आरोपी चेन स्नेचिंग, लूट की घटना को भी अंजाम देते और फिर छुप जाते।

खास बात यह है कि ईरानी डेरे के यह अपराधी जिस शहर के होते उस शहर में वारदात नहीं करते और दूसरे शहर में घटना को अंजाम देकर आकर भोपाल के इस डेरे में छुप जाते हैं। पुलिस भी यहां कार्रवाई करने से डरती है क्योंकि जब भी पुलिस की कार्रवाई होती डेरे में बच्चों और महिलाओं को आगे कर दिया जाता, लेकिन इस बार पुलिस बल ने इनके मंसूबो को सफल नहीं होने दिया। ईरानी डेरे से जुड़े गिरोहों की गतिविधियां महाराष्ट्र, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक समेत करीब एक दर्जन राज्यों तक फैली हुई बताई जाती हैं।

पुलिस के अनुसार, ये लोग अक्सर समूह बनाकर दूसरे राज्यों में जाते हैं और सुनियोजित तरीके से वारदातों को अंजाम देते हैं। मध्य एशिया से आये यह ईरानी खानाबदोश है जो फारस यानी ईरान से आये, घोड़ो का व्यापार, हथियार बनाने वाले कब संगठित होकर अपराधों को अंजाम देने लगे।

ईरानी डेरे के अपराध का तरीका

  • पुलिस के मुताबिक गैंग का कामकाज एक सुनियोजित चेन सिस्टम पर चलता है।
  • बदमाश वारदात से करीब एक माह पहले शहर में एंट्री करते है, इलाके की बारीकी से रेकी होती है, पुलिस गश्त और टारगेट फिक्स किए जाते। पूरी प्लानिंग के बाद लूट–झपटमारी जैसी वारदातों को अंजाम दिया जाता।
  • कबीलाई ढांचे में गिरोह चलता है
  • ईरानी डेरे की कार्यप्रणाली पारंपरिक अपराध गिरोहों से अलग बताई जाती है। यहां अपराध से मिली रकम पहले सरदार को दी जाती है। वही तय करता है कि किसे कितना हिस्सा मिलेगा। किसी सदस्य की गिरफ्तारी पर उसके परिवार की जिम्मेदारी भी कबीला संभालता है।
  • सरदार का चयन कबीलाई पंचायत में होता है, जहां पुराने आपराधिक रिकॉर्ड को अहम माना जाता है।
  • डेरे के कई युवक महीनों तक कबीले से दूर रहते है। वारदात के लिए लंबे समय तक बाहर रहते हैं, जिसे वे ‘सफर’ कहते हैं। इस दौरान कुछ सदस्य सीधे अपराध में शामिल होते हैं। कुछ केवल लूट का माल सुरक्षित वापस लाने की जिम्मेदारी निभाते हैं। कुछ युवक अपराध का पैसा लेकर कबीले तक पहुंचते हैं, तो कुछ चोरी या अपराध से हथियाया हुआ समाना बाजार में बेचते हैं। सबसे खास बात ये है कि कुछ कुछ दिनों में अपना हुलिया बदल लेते है।

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ईरानी डेरे पर पुलिस की कार्रवाई कब हुई?

27 और 28 दिसम्बर की दरमियानी रात।

पुलिस को डेरे से क्या मिला?

महंगी मोटरसाइकिल, डॉलर, रियाल, आईफोन और बड़ी संख्या में फर्जी आईकार्ड।

आरोपी लोगों को कैसे ठगते थे?

खुद को CBI, पुलिस अधिकारी, कस्टम अफसर या पत्रकार बताकर छापेमारी के नाम पर पैसे ऐंठते थे।