साल बोरर से जंगल बचाने की अनूठी पहल, हर कीट पकड़ने पर ग्रामीणों को मिल रहे दो रुपये

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साल बोरर से जंगल बचाने की अनूठी पहल, हर कीट पकड़ने पर ग्रामीणों को मिल रहे दो रुपये

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  • Publish Date - July 18, 2026 / 02:01 PM IST,
    Updated On - July 18, 2026 / 02:01 PM IST

डिंडोरी (मध्यप्रदेश), 18 जुलाई (भाषा) डिंडोरी जिले में साल के जंगलों को साल बोरर कीट के प्रकोप से बचाने के लिए वन विभाग ने जनभागीदारी पर आधारित एक अनूठा अभियान शुरू किया है जिसके तहत ग्रामीणों को पकड़े गए प्रत्येक कीट के बदले दो रुपये का प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

इस अभियान में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग बड़ी संख्या में जंगलों में जाकर कीट पकड़ रहे हैं। ग्रामीण 100 कीटों के कटे हुए सिरों की माला बनाकर निर्धारित संग्रह केंद्रों पर जमा कर रहे हैं, जहां उन्हें भुगतान किया जा रहा है।

पश्चिम करंजिया के परिक्षेत्र अधिकारी (आरएफओ) कौशांबी झा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘इस पहल का उद्देश्य स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी से साल बोरर कीट की संख्या को नियंत्रित करना और साल के जंगलों की रक्षा करना है।’’

वन अधिकारियों ने बताया कि भारत, बांग्लादेश, नेपाल, तिब्बत और हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले साल के वृक्ष मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा हैं और हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार हैं।

उन्होंने बताया कि 2026-27 में अब तक करीब 30,487 हेक्टेयर वन क्षेत्र के लगभग 1.47 लाख साल के पेड़ इस कीट के प्रकोप से प्रभावित हो चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार, करीब 30 वर्ष पहले भी इस क्षेत्र में ऐसा ही प्रकोप हुआ था, जिसके बाद संक्रमण रोकने के लिए हजारों प्रभावित पेड़ों को काटना पड़ा था।

अधिकारियों ने बताया कि साल बोरर कीट का जीवन चक्र लगभग 15 दिन का होता है और इसकी मादा एक बार में 300 से 500 अंडे देती है। मानसून के बाद यह कीट पेड़ों में प्रवेश कर कुछ ही दिनों में हरे-भरे वृक्षों को भीतर से खोखला कर देता है।

उन्होंने बताया कि डिंडोरी जिले में लगभग 2.5 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है, जिसमें करीब 1.5 लाख हेक्टेयर में साल के जंगल फैले हैं। इन जंगलों में साल के लगभग 40 करोड़ पेड़ हैं।

इस प्रकोप के नियंत्रण के लिए वन विभाग ने ‘ट्रैप ट्री’ अभियान भी शुरू किया है जिसके प्रत्येक दो हेक्टेयर क्षेत्र में साल के एक पेड़ की कटाई या छंटाई की जाती है जिसके बाद इससे निकलने वाली गंध से साल बोरर कीट आकर्षित होकर उस पेड़ पर एकत्र हो जाते हैं और फिर उन्हें आसानी से पकड़ लिया जाता है।

उप वनमंडलाधिकारी (वन) एस. के. जाटव ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ग्रामीण सुबह पांच बजे से सात बजे के बीच इन ‘ट्रैप ट्री’ से कीट एकत्र करते हैं। अब तक 11 लाख से अधिक साल बोरर कीट एकत्र किए जा चुके हैं।’’

अधिकारियों ने बताया कि इन कीटों को खरीडीह, चौरादादर, कबीर, जगतपुर और करंजिया में बनाए गए पांच संग्रह केंद्रों पर जमा कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान से जहां कीटों की संख्या नियंत्रित करने में मदद मिल रही है, वहीं ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिला है।

उत्पादन वनमंडलाधिकारी भारती ठाकरे ने बताया कि विभाग ने साल के ऐसे 1,46,784 पेड़ों की पहचान की है, जो कीटों के प्रकोप से गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ये पेड़ कीटों के हमले से भीतर से खोखले हो चुके हैं। इन्हें काटने के लिए केंद्र सरकार से अनुमति मांगी गई है, जिसके मिलने में लगभग तीन महीने लग सकते हैं। तब तक शेष हरे-भरे पेड़ों की सुरक्षा के लिए यह अभियान जारी रखा जाएगा।’’

भाषा सं दिमो वैभव खारी

खारी