Apollo Hospitals Facility: अपोलो सेज हॉस्पिटल में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट और ECMO उपचार शुरू, इन मरीजों को मिल रहा विशेष लाभ, अब तक हुए 600 से अधिक प्रत्यारोपण

अपोलो सेज हॉस्पिटल में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट और ECMO उपचार शुरू, इन मरीजों को मिल रहा विशेष लाभ, Apollo Hospitals Facility Expansion

Apollo Hospitals Facility: अपोलो सेज हॉस्पिटल में हार्ट-लंग ट्रांसप्लांट और ECMO उपचार शुरू, इन मरीजों को मिल रहा विशेष लाभ, अब तक हुए 600 से अधिक प्रत्यारोपण
Modified Date: February 21, 2026 / 08:33 pm IST
Published Date: February 21, 2026 8:32 pm IST

भोपालः Apollo Hospitals Facility: अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप ने उन्नत हृदय और फेफड़ों से संबंधित रोगों के उपचार में एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर नया मानक स्थापित किया है। अपोलो के व्यापक हार्ट, लंग एवं ECMO समर्थित ट्रांसप्लांट प्रोग्राम के अंतर्गत अब तक 600 से अधिक हार्ट व लंग ट्रांसप्लांट, 2,000 से अधिक ट्रांसप्लांट मरीजों का प्रबंधन, 1,000 से अधिक ECMO केस, 250 से अधिक LVAD प्रक्रियाएं और 250 से ज्यादा CTEPH हस्तक्षेप सफलतापूर्वक किए जा चुके हैं।

दरअसल, भोपाल में शुरू किया गया टर्शियरी केयर हार्ट-लंग फेल्योर एवं मैकेनिकल सर्कुलेटरी सपोर्ट (MCS) प्रोग्राम उन मरीजों के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया है, जो अधिकतम दवाओं के बावजूद अंतिम चरण की हार्ट या लंग फेल्योर से जूझ रहे हैं। यहां स्थिरीकरण, ट्रांसप्लांट तक ब्रिजिंग और स्थायी मैकेनिकल हार्ट पंप जैसी उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल द्वारा कार्डियोलॉजी, पल्मोनोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, क्रिटिकल केयर, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन और रिहैबिलिटेशन के समन्वित 360-डिग्री मॉडल के तहत मरीजों को डिस्चार्ज के बाद भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराता है।

ECMO और LVAD जैसी उन्नत तकनीकें

Apollo Hospitals Facility: बता दें कि इस अस्पताल में ECMO और LVAD जैसी उन्नत तकनीकें उपलब्ध है। ECMO (एक्स्ट्राकोर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन) को इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण लाइफ-सपोर्ट माना गया है, जो पारंपरिक उपचार विफल होने पर हृदय और फेफड़ों का कार्य अस्थायी रूप से संभालता है। यहां VV-ECMO लंग सपोर्ट तथा VA-ECMO हार्ट व संयुक्त हार्ट-लंग फेल्योर के लिए उपलब्ध है। साथ ही LVAD (लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस) को हार्ट ट्रांसप्लांट तक ब्रिज या स्थायी विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है।

72 वर्षीय मरीज का सफल केस

हाल ही में आइडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से पीड़ित 72 वर्षीय राधेश्याम रघुवंशी अपोलो सेज हॉस्पिटल्स भोपाल में भर्ती हुए। डॉ. खुशबू सक्सेना और उनकी टीम ने ECMO के माध्यम से मरीज को स्थिर कर ट्रांसप्लांट के लिए अनुकूल स्थिति में पहुंचाया। इसके बाद उन्हें एयरलिफ्ट कर अपोलो हॉस्पिटल चेन्नई भेजा गया, जहां सफलतापूर्वक सीक्वेंशियल लंग ट्रांसप्लांट किया गया। कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट एवं स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. खुशबू सक्सेना ने कहा कि ECMO का समय पर और उचित उपयोग गंभीर फेफड़ों की विफलता की दिशा ही बदल सकता है। यह ट्रांसप्लांट की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण ब्रिज प्रदान करता है। हमारा लक्ष्य केवल जीवन बचाना नहीं, बल्कि मरीज को अर्थपूर्ण और स्वतंत्र जीवन देना है। चेन्नई स्थित अपोलो हॉस्पिटल्स के हार्ट एवं लंग ट्रांसप्लांटेशन विभाग के हेड डॉ. कुमुद कुमार धीतल कहा कि हार्ट और लंग फेल्योर से पीड़ित मरीजों को ट्रांसप्लांट विकल्पों की जानकारी समय रहते दी जानी चाहिए। उम्र बाधा नहीं है, महत्वपूर्ण है सही मूल्यांकन, सटीक सर्जरी और आजीवन फॉलो-अप।

गरिमा और आत्मनिर्भरता लौटाना हमारा उद्देश्यः- CMD

अपोलो सेज हॉस्पिटल्स के CEO धनंजय कुमार ने कहा कि हमारा मुख्य उद्देश्य मरीजों को केंद्र में रखकर ऐसी उन्नत हार्ट और लंग फेल्योर सेवाएं विकसित करना है, जिससे सेंट्रल इंडिया के मरीजों को समय पर सही विशेषज्ञ परामर्श, ECMO और ट्रांसप्लांट से जुड़ी सुविधाएं अपने ही शहर में उपलब्ध हो सकें। इससे न केवल इलाज में समय की बचत कम होगी, बल्कि मरीजों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला मानसिक व आर्थिक बोझ भी कम होगा। वहीं सेज ग्रुप के CMD संजीव अग्रवाल ने कहा कि हार्ट और लंग ट्रांसप्लांट प्रोग्राम की सफलता वर्षों की निरंतर निवेश, तकनीक और टीमवर्क का परिणाम है। हमारा उद्देश्य मरीजों को केवल जीवन नहीं, बल्कि गरिमा और आत्मनिर्भरता लौटाना है।

भोपाल में अब चेन्नई के डॉक्टरों की टीम

बता दें कि अपोलो सेज हॉस्पिटल्स, भोपाल में स्थापित इंस्टीट्यूट ऑफ पल्मोनोलॉजी, जहां डॉ. खुशबू सक्सेना एवं डॉ. सुनील यादव के नेतृत्व में ट्रांसप्लांट मेडिसिन, ECMO तथा दीर्घकालिक श्वसन देखभाल पर विशेष फोकस किया जाता है। शीघ्र ही एडवांस्ड हार्ट एंड लंग फेल्योर क्लिनिक की शुरुआत की जा रही है। इस पहल के तहत अब मरीजों को परामर्श के लिए बड़े महानगरों की यात्रा करने की आवश्यकता नहीं होगी। चेन्नई अपोलो की टीम नियमित रूप से भोपाल में उपलब्ध रहेगी।

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