किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है : उमा भारती

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किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है : उमा भारती

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  • Publish Date - January 27, 2026 / 05:58 PM IST,
    Updated On - January 27, 2026 / 05:58 PM IST

भोपाल, 27 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित संगम में मौनी अमावस्या स्नान को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के मध्य जारी विवाद के बीच मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को कहा कि किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखने की नसीहत देते हुए भारती ने उम्मीद जताई कि जल्द ही इस विवाद का कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा।

उल्लेखनीय है कि माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मौनी अमावस्या स्नान करने से मेला प्रशासन और पुलिस द्वारा कथित तौर पर रोके जाने को लेकर विवाद हो गया था।

इसके बाद मेला प्रशासन ने उन्हें नोटिस भेजकर कहा था कि उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन दीवानी अपील में आदेश दिया गया था कि जब तक अपील निस्तारित नहीं हो जाती, तब तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं हो सकता।

नोटिस में कहा गया था कि इससे स्पष्ट है कि कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेकित नहीं किया गया है, बावजूद इसके प्रयागराज माघ मेला 2025-26 में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर में लगाए गए बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित व प्रदर्शित किया गया है।

इसके जवाब में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की टीम ने प्रशासन पर शंकराचार्य और उनके शिष्यों की सदियों पुरानी परंपराओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था।

इस विवाद का उल्लेख करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वरिष्ठ नेता भारती ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज एवं उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। किंतु प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा शंकराचार्य होने का सबूत मांग कर प्रशासन ने मर्यादाओं एवं अधिकारों का उल्लंघन किया है। यह अधिकार तो सिर्फ शंकराचार्यों एवं विद्वत परिषद का है।’’

उमा भारती के इस पोस्ट को जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरूद्ध में देखा जाने लगा तो उन्होंने कुछ देर बाद एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘‘योगी विरोधी खुशफहमी ना पालें, मेरा कथन योगी जी के विरुद्ध नहीं है। मैं उनके प्रति सम्मान, स्नेह एवं शुभकामना का भाव रखती हूं। किंतु मैं इस बात पर कायम हूं कि प्रशासन कानून-व्यवस्था पर सख्ती से नियंत्रण करे लेकिन किसी के शंकराचार्य होने का सबूत मांगना मर्यादा का उल्लंघन है। यह सिर्फ शंकराचार्य या विद्वत परिषद कर सकते हैं।’’

भाषा ब्रजेन्द्र शफीक

शफीक