Balaghat News: विधवा बेटी की दूसरी शादी बनी ‘गुनाह’? समाज ने कर दिया 10 साल के लिए बहिष्कार, इतने हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका, अब न्याय की गुहार

Balaghat News: विधवा बेटी की दूसरी शादी बनी ‘गुनाह’? समाज ने कर दिया 10 साल के लिए बहिष्कार, इतने हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका, अब न्याय की गुहार

Balaghat News: विधवा बेटी की दूसरी शादी बनी ‘गुनाह’? समाज ने कर दिया 10 साल के लिए बहिष्कार, इतने हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका, अब न्याय की गुहार

Balaghat Widow Remarriage/Image Source: symbolic

Modified Date: February 12, 2026 / 11:42 am IST
Published Date: February 12, 2026 11:40 am IST
HIGHLIGHTS
  • विधवा बेटी की दूसरी शादी पर बवाल
  • पूरे परिवार का 10 साल का बहिष्कार
  • 25 हजार का जुर्माना भी ठोका

बालाघाट: Balaghat News: भारत ने समय के साथ सामाजिक बदलावों की लंबी यात्रा तय की है, लेकिन आज भी कई जगहों पर रूढ़िवादी सोच इंसानियत पर भारी पड़ती नजर आती है। ताज़ा मामला मध्यप्रदेश के बालाघाट ज़िले के लांजी क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी विधवा बेटी का पुनर्विवाह कराया तो समाज ने पूरे परिवार को बहिष्कृत कर दिया। आरोप है कि समाज के ठेकेदारों ने न सिर्फ 10 साल के लिए सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाया, बल्कि 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। पीड़ित परिवार अब न्याय की आस में प्रशासन की शरण में पहुंचा है।

पिता ने बसाई बेटी की जिंदगी (Balaghat Widow Remarriage Case)

Balaghat News: लांजी के मंडई टेकरी गांव में रहने वाले मानक सोनवाने की बेटी की शादी करीब तीन साल पहले हुई थी, लेकिन दुर्भाग्यवश शादी के ढाई महीने बाद ही उसके पति की मौत हो गई। महज़ 22 साल की उम्र में विधवा हुई बेटी तीन साल तक मायके में रही। माता-पिता से बेटी का दर्द देखा नहीं गया और उन्होंने समाज की परवाह किए बिना उसका पुनर्विवाह कर दिया। लेकिन शादी गैर-बिरादरी में होने की वजह से समाज के कथित ठेकेदारों ने गुपचुप बैठक कर पूरे परिवार से रिश्ते-नाते तोड़ने का फैसला कर लिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि बेटी की उजड़ी ज़िंदगी को संवारना अगर गुनाह है, तो वे इस “गुनाह” को बार-बार करेंगे।

समाज ने कर दिया बहिष्कार (Social Boycott Madhya Pradesh)

Balaghat News: इस संबंध में समाज के अध्यक्ष अजय पालेवार ने कहा कि समाज में पहले से कुछ नियम तय हैं जिन्हें सभी लोग मानते हैं। उनका कहना है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे समाज में शादी करता है, तो यह उसका निजी फैसला है लेकिन समाज भी अपनी मर्ज़ी से रिश्ते तय करता है। अध्यक्ष का कहना है कि समाज ने किसी पर जबरदस्ती नहीं की। सभी फैसले बैठक में सामूहिक रूप से लिए गए हैं और जिसे समाज के नियम ठीक नहीं लगते वह अपने हिसाब से निर्णय ले सकता है।

Balaghat News: मामले में पीड़ित परिवार ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराई है। प्रशासन ने मामले को एसडीएम लांजी को जांच के लिए सौंप दिया है। प्रशासन का कहना है कि सामाजिक बहिष्कार कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और सभी पक्षों को बुलाकर काउंसलिंग भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच के बाद इस मामले में क्या कार्रवाई होती है। लेकिन सवाल यही है कि 21वीं सदी में भी क्या किसी बेटी की दूसरी ज़िंदगी बसाने की सज़ा सामाजिक बहिष्कार होनी चाहिए?

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सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नः

लेखक के बारे में

टिकेश वर्मा- जमीनी पत्रकारिता का भरोसेमंद चेहरा... टिकेश वर्मा यानी अनुभवी और समर्पित पत्रकार.. जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव हैं। राजनीति, जनसरोकार और आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से सरकार से सवाल पूछता हूं। पेशेवर पत्रकारिता के अलावा फिल्में देखना, क्रिकेट खेलना और किताबें पढ़ना मुझे बेहद पसंद है। सादा जीवन, उच्च विचार के मानकों पर खरा उतरते हुए अब आपकी बात प्राथिकता के साथ रखेंगे.. क्योंकि सवाल आपका है।