भोजशाला विवाद : एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट पर मप्र उच्च न्यायालय में नहीं हो सकी सुनवाई

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भोजशाला विवाद : एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट पर मप्र उच्च न्यायालय में नहीं हो सकी सुनवाई

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  • Publish Date - February 16, 2026 / 03:34 PM IST,
    Updated On - February 16, 2026 / 03:34 PM IST

इंदौर, 16 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश में धार के ‘भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर’ को लेकर जारी विवाद के मामले में उच्च न्यायालय में सोमवार को वकीलों की हड़ताल के चलते सुनवाई टल गई। एक पक्षकार ने यह जानकारी दी।

हिंदू समुदाय भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।

उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह विवादित परिसर के बारे में एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करे। इस आदेश के बाद उच्च न्यायालय में सोमवार को पहली बार यह मामला सूचीबद्ध हुआ था।

प्रदेश भर में वकीलों की हड़ताल के चलते हिंदू और मुस्लिम समुदायों के पक्षकार इस मामले में अदालत में खुद हाजिर हुए।

याचिकाकर्ता संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ से जुड़े पक्षकार आशीष गोयल ने संवाददाताओं को बताया कि वकीलों की हड़ताल के चलते मामले में सुनवाई की तारीख बढ़ा दी गई।

उन्होंने बताया कि अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 18 फरवरी (बुधवार) की तारीख तय की है।

मुस्लिम पक्ष की ओर से मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी से जुड़े अब्दुल समद उच्च न्यायालय में उपस्थित रहे। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि अदालत द्वारा विवादित परिसर के बारे में किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले उच्च न्यायालय की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ में उनके पक्ष की ओर से वर्ष 2019 में दायर याचिका का निपटारा किया जाना चाहिए।

समद ने बताया कि इस याचिका में विवादित परिसर को लेकर एएसआई के सात अप्रैल 2003 के एक आदेश को अनुचित बताया गया है और कहा गया है कि इस आदेश का कथित रूप से उचित पालन नहीं किया जा रहा है।

धार के इस परिसर को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई के जारी इस आदेश के अनुसार अब तक चली आ रही व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को वहां प्रत्येक मंगलवार पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस जगह नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।

उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी को उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करे और इसे संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए, ताकि वे इसपर अपनी आपत्ति दर्ज करा सकें।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि आपत्तियां दर्ज किए जाने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा था कि जब तक मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, सभी पक्षकार विवादित परिसर में यथास्थिति बनाए रखेंगे और वे एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन जारी रखेंगे।

भाषा हर्ष सुरेश

सुरेश