भोजशाला विवाद : अदालत ने एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश करने के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी
भोजशाला विवाद : अदालत ने एएसआई की रिपोर्ट पर आपत्तियां पेश करने के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी
इंदौर, 23 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर जारी विवाद के मामले में सोमवार को सभी पक्षकारों को अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और सिफारिशें पेश करने के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी।
भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है।
शीर्ष अदालत ने 22 जनवरी को उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह विवादित परिसर के बारे में एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट खोले।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पाया कि यह रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और इसकी प्रति पक्षकारों को प्रदान की भी जा चुकी है।
युगल पीठ ने रेखांकित किया कि पक्षकारों ने इस रिपोर्ट पर अब तक अपनी आपत्तियां, अभिमत, सुझाव और सिफारिशें अदालत के सामने पेश नहीं की हैं।
अदालत ने कहा, ‘‘इस स्थिति के मद्देनजर पक्षकारों को इस रिपोर्ट पर आपत्तियां, अभिमत, सुझाव और सिफारिशें पेश करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी जाती है।’’
उच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख तय की है।
याचिकाकर्ता संगठन ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ के वकील विनय जोशी ने संवाददाताओं को बताया कि एएसआई ने विवादित परिसर में 98 दिनों के वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद 10 खंडों में 2,000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट तैयार की है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विस्तृत रिपोर्ट में परिसर में मिले सिक्कों, सनातन धर्म से जुड़े प्रतीक चिह्नों और देवी-देवताओं की मूर्तियों आदि का विस्तृत विवरण दिया गया है। हालांकि, इस परिसर की प्रकृति अदालत के अंतिम फैसले से तय होगी।’’
विवादित परिसर की कमाल मौला मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करने वाले तीन लोगों ने उच्च न्यायालय में ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की ओर से दायर मुकदमे में हस्तक्षेप याचिका दायर की है।
इनके वकील अशहर वारसी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का मुकदमा विवादित परिसर के तथ्यों के बारे में है और इन तथ्यों की सत्यता के बारे में फैसला करने के लिए पहले दीवानी न्यायालय में सुनवाई होनी चाहिए। लिहाजा हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस का मुकदमा फिलहाल उच्च न्यायालय में सुनवाई योग्य ही नहीं है।’’
धार के ऐतिहासिक परिसर को लेकर विवाद शुरू होने के बाद एएसआई ने सात अप्रैल 2003 को एक आदेश जारी किया था।
इस आदेश के अनुसार अब तक की व्यवस्था के मुताबिक हिंदुओं को इस परिसर में प्रत्येक मंगलवार पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिमों को हर शुक्रवार वहां नमाज अदा करने की इजाजत दी गई है।
भाषा हर्ष खारी
खारी

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