भोपाल। Bhopal IAS Land Scam: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगे कोलार क्षेत्र के गुराड़ी घाट गांव में जमीन खरीद का एक मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। देश के अलग-अलग राज्यों में पदस्थ करीब 50 IAS और IPS अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही दिन यहां कृषि भूमि खरीदी और करीब 16 महीने बाद उसी इलाके के पास से 3200 करोड़ रुपये के वेस्टर्न बायपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई। बताया जा रहा है कि अब इस जमीन का मूल्य करीब 65 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अब इस मामले के बाद कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
Bhopal IAS Land Scam: दरअसल, भोपाल शहर में लगातार यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। सरकार ने इसे कम करने के लिए वेस्टर्न बायपास को मंजूरी दी। जिस इलाके से यह हाईवे गुजर रहा है, उसी इलाके में गुराड़ी घाट गांव भी पड़ता है। इसी गांव में प्रोजेक्ट की मंजूरी से पहले 50 IAS और IPS अधिकारियों ने 4 अप्रैल 2022 को एक ही दिन यहां कृषि भूमि खरीदी। हैरानी की बात तो यह भी है कि यहां केवल मध्यप्रदेश कैडर के ही अधिकारियों ने जमीन नहीं ली है, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हरियाणा कैडर और दिल्ली में पदस्थ कई आईएएस-आईपीएस अफसर भी शामिल हैं। जमीन की रजिस्ट्री उस समय 5 करोड़ 50 लाख रुपए में हुई थी, जबकि बाजार की कीमत 7 करोड़ 78 लाख रुपए थी. अधिकारियों द्वारा खरीदी गई जमीन से सिर्फ 500 मीटर ही दूर है. इसके बाद जो जमीन कृषि भूमि के तौर पर वर्गीकृत थी, उसे बदलकर आवासीय कर दिया गया. ये काम बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के लगभग 10 महीने बाद यानि कि जून 2024 को इसे आधिकारिक तौर पर कृषि से बदलकर आवासीय कर दिया गया. अधिकारियों ने सरकारी दस्तावेजों यानी IPR (Immovable Property Return) में इसे बड़े गर्व से Like-minded officers का निवेश बताया गया यानी एक जैसी सोच वाले अफसरों का समूह।
गुराड़ी घाट गांव के किसानों ने भी अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदे जाने की पुष्टि की है। वहीं सिस्टम परिवर्तन अभियान के प्रमुख रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने सवाल उठाते हुए कहा यह भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है ,पहले बड़े-बड़े बिल्डर नेता ऐसा भ्रष्टाचार करते थे अब अधिकारी ही शामिल हो गए, पहले अधिकारी जमीन खरीदते है, उसके 16 महीने बाद ही वेस्टर्न बायपास को मंजूरी मिल जाती है,साथ ही 3200 करोड़ के बायपास का दो-तीन बार एलाइनमेंट बदल जाता है लेकिन हर बार उन अधिकारियों की जमीन को टच करता है, कृषि भूमि से आवासीय भूमि हो जाती है 5 करोड़ की जमीन की कीमत वहां 65 करोड़ रुपए हो गई, जबकि वहां टाइगर मूवमेंट इलाका है वहां पर वेस्टर्न बायपास बनाना ही नहीं चाहिए, जब भोपाल में ईस्टर्न बायपास है तो वेस्टर्न बायपास की जरूरत नहीं।
अफसरों के जमीन खरीदी के इस खेल पर सियासत भी शुरू हो गई है कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि तीन बार वेस्टर्न बायपास का रूट बदला गया,जहां अधिकारियों की जमीन है वहां सड़क को मोड़ते है अधिकारीयों के फायदे के लिए इस तरह सड़क नहीं बनाना चाहिए जो सही रूट है उसपर सड़क बनाना चाहिए। बीजेपी प्रवक्ता डॉ. हितेश वाजपेई ने कहा मामला सरकार के संज्ञान में है। जांच करवाई जाएगी। बहरहाल इसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे है कि क्या इसे सिर्फ एक संयोग माना जायेगा कि देशभर के करीब 50 वरिष्ठ अफसर एक ही दिन, एक ही गांव में जमीन खरीदते हैं और कुछ ही महीनों बाद वहीं से हजारों करोड़ का प्रोजेक्ट गुजरने लगता है?