Ganga Mai ki Betiyan 11th August 2026/
Ganga Mai ki Betiyan: ‘ZEE TV’ के सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा शो ‘गंगा माई की बेटियाँ‘ में कॉलेज में चल रहे तनावपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बीच अचानक पत्थर चलने लगते हैं जिससे स्नेहा और छात्र मुश्किल में पड़ जाते हैं।
कॉलेज स्टाफ को घायल होने से बचाने के लिए स्नेहा, पारस और अन्य छात्र तुरंत आगे बढ़ते हैं। इससे यह साफ दिखता है कि प्रदर्शनकारी हिंसा नहीं चाहते थे। स्नेहा इस स्थिति का फायदा उठाकर प्रिंसिपल को समझाती है कि उसने किसी को भी शिक्षकों या स्टाफ पर हमला करने के लिए नहीं बुलाया था।
वह कहती है कि उनका विरोध हमेशा से शांतिपूर्ण रहा है और उनका एकमात्र मकसद सोनी को इंसाफ दिलाना है। स्नेहा प्रिंसिपल से गुजारिश करती है कि वे इस हिंसा के कारण पूरे प्रदर्शनकारी समूह को दोषी मानने के बजाय वे उनकी बात का विश्वास करें।
मगर प्रिंसिपल अपनी जिद पर अड़े रहते हैं।
वे स्नेहा और अन्य छात्रों से प्रदर्शन रोकने के लिए कहते हैं। इसके साथ ही, वे भरोसा दिलाते हैं कि कॉलेज रैगिंग के खिलाफ कड़ा एक्शन लेगा और कैंपस में दोबारा ऐसी कोई गैर-कानूनी हरकत नहीं होने देगा। मगर स्नेहा इस मामले को यहीं रोकने से मना कर देती है।
वह प्रिंसिपल से सोनी के भविष्य पर सवाल करते हुए पूछती है कि वे उसकी पढ़ाई दांव पर लगाकर सिर्फ रैगिंग रोकने का दावा कैसे कर सकते हैं? स्नेहा उन्हें याद दिलाती है कि सोनी खुद रैगिंग का शिकार हुई थी और उसने इसके खिलाफ आवाज उठाई, फिर भी सजा उसी को मिल रही है।
प्रिंसिपल दुखी होकर स्नेहा को बताते हैं कि कमेटी ने सोनी को ही कसूरवार माना है। चूंकि कमेटी फैसला सुना चुकी है, इसलिए वे अकेले इसे नहीं बदल सकते। वे अपनी मजबूरी जताते हुए कहते हैं कि वे सोनी को कॉलेज में वापस नहीं ले सकते। वह स्नेहा और अन्य छात्रों से माफ़ी मांगते हैं।
प्रिंसिपल के इस फैसले को सुनकर सोनी रो पड़ती है, उसे एहसास होता है कि स्नेहा की कोशिशों के बावजूद उसकी पढ़ाई अभी भी ख़तरे में हैं।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या स्नेहा कॉलेज के इस फैसले के आगे घुटने टेक देगी? या फिर वह कोई ऐसा रास्ता निकालेगी जिससे यह साबित हो सके कि सोनी बेकसूर है और उसे शिवानी ने ही इस जाल में फंसाया था?