Reported By: Vivek Pataiya
,Bhopal News
भोपाल: Bhopal News, मध्य प्रदेश में नए साल की शुरुआत में ही कर्मचारियों का आक्रोश सामने आने लगा है। अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारी आंदोलित होंगे। कर्मचारियों के आंदोलन पर सियासत भी शुरू हो गई है। देखिए IBC24 की ये स्पेशल रिपोर्ट
प्रदेश में एक बार फिर कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। सालों से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संगठन आंदोलित होंगे। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े कर्मचारी संगठन तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने आंदोलन का ऐलान किया, संगठन के अनुसार 15 जनवरी को मंत्रालय के सामने बड़ा आंदोलन होगा। जहां औपचारिक ज्ञापनों की जगह आक्रोश और एकजुटता दिखाई देगी। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रदेशभर से कर्मचारी राजधानी में एकजुट होंगे। मंत्रालय के साथ जिला और तहसील मुख्यालयों में अपनी मांगों को लेकर मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
Bhopal News, मध्य प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं होगा,बल्कि अधिकारों की लड़ाई की शुरुआत है। लिपिक वर्गीय संघ, लघु वेतन संघ, मंत्रालय संघ समेत सभी संगठनों ने एकजुट होकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तय की।
प्रदेश के कर्मचारी इन 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। जिसमें 1-कार्यरत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को केंद्र के समान महंगाई भत्ता दी जाए। 2-कर्मचारियों को कैशलेस स्वास्थ बीमा का लाभ दिया जाये। 3-नवनियुक्त कर्मचारियों को 70, 80, 90% वेतन देने के आदेश पर रोक लगाई जाए 4-पुरानी पेंशन योजना लागू की जाए । 5-शिक्षा विभाग, अनुसूचित जनजाति विभाग के शिक्षकों को चतुर्थ क्रमोन्नत वेतनमान दिया जाये। 6-लिपिक संवर्ग को मंत्रालय के लिपिकों की भांति ग्रेड पे दिया जाए। 7-दैनिक वेतन कर्मी, स्थाई कर्मी, आउटसोर्स , संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए। 8-अनुकंपा नियुक्ति, चतुर्थ श्रेणी की पदोन्नति पर सीपीसीटी की अनिवार्यता खत्म हो। 9-सेवानिवृत होने वाले कर्मचारियों को पीपीओ समेत सभी भुगतान सेवानिवृत्ति पर मिले । 10-ई अटेंडेंस पर तत्काल रोक लगाई जाए । 11-गुरुजी संवर्ग को सभी लाभ प्रदान किए जाए ।
कर्मचारियों के आंदोलन पर अब सियासत भी होने लगी है। बीजेपी खुद को कर्मचारी हितैषी बता रही है, तो कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। इस बार कर्मचारी आरपार की लड़ाई के मूड में है। यही वजह है कि एक रणनीति के तहत चरणबद्ध तरीके से आंदोलन किया जाएगा। पहले दिन सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा। इसके बाद कर्मचारी आरपार की लड़ाई लड़ेंगे।