Meenakshi Nomination Rejection Reasons: क्या वाकई मीनाक्षी नटराजन ने कर दी बड़ी गलती?.. लीगल एक्सपर्ट से जानें आखिर कितना जरूरी है नामांकन में लंबित मामलों की जानकारी देना..

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Meenakshi natarajan ka namankan kyo reject hua: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कानूनी बहस तेज, कांग्रेस चुनाव आयोग से पुनर्विचार की मांग करेगी।

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 10:04 AM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 10:09 AM IST

Meenakshi Natarajan Nomination Rejection Reasons || Image- PTI File

HIGHLIGHTS
  • लंबित मामले की जानकारी न देने पर नामांकन खारिज हुआ।
  • कानूनी विशेषज्ञ ने रिटर्निंग ऑफिसर की कार्रवाई को उचित बताया।
  • कांग्रेस चुनाव आयोग और अदालत में चुनौती देने की तैयारी में।

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने विरोध दर्ज कराया है। (Meenakshi Natarajan Nomination Rejection Reasons) चुनाव आयोग ने कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को मंगलवार यानी आज दोपहर 12 बजे मुलाकात का समय दिया। कांग्रेस नेताओं ने आयोग को ज्ञापन सौंपकर फैसले पर फिर से विचार करने की मांग की है।

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कितना जरूरी है लंबित मामलों का नामांकन में जिक्र?

भाजपा का दावा है कि, मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना में लंबित एक मामले की जानकारी नामांकन में नहीं दी है। यही वजह है कि, उनका नॉमिनेशन ख़ारिज कर दिया गया। दूर तरफ कांग्रेस का दावा है कि, मीनाक्षी का नाम एफआईआर में नहीं है। ऐसे में सिर्फ नोटिस को आधार बनाकर नॉमिनेशन रद्द किया जाना सही नहीं है। हालाँकि कानूनी एक्सपर्ट की राय इससे अलग है।

कानून विषेशज्ञ व एडवोकेट पंकज दुबे ने इस बारें में IBC24 से बातचीत की है। उनके मुताबिक नॉमिनेशन फॉर्म में हर केस की जानकारी देना ज़रूरी होता है। तेलंगाना में लंबित केस की जानकारी भी उन्हें देनी थी। भले ही वह कानूनन नोटिस क्यों न हो, अपने फॉर्म उसका जिक्र किया जाना चाहिए था। पंकज दुबे ने बताया कि, तथ्य छुपाने की स्थिति में रिटर्निंग ऑफिसर कार्यवाई के लिए बाध्य है। उन्होंने कहा कि, मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस चाहे तो कोर्ट का रूख कर सकते है।

कांग्रेस-भाजपा के बीच शुरू हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर

भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीनाक्षी नटराजन ने भाजपा पर राज्यसभा चुनाव को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पर्याप्त विधायकों का समर्थन न होने के बावजूद तीसरा उम्मीदवार उतारा। नटराजन ने दावा किया कि यह लोकतंत्र और संविधान की भावना के खिलाफ है। (Meenakshi Natarajan Nomination Rejection Reasons) उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सीट का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने की लड़ाई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितु पटवारी ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर पूरी ताकत से संघर्ष करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया को राजनीतिक रूप दिया गया है।

कांग्रेस ने किया कानूनी लड़ाई लड़ने का ऐलान

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सीट छीनने के लिए यह कदम उठाया गया है। वेणुगोपाल ने कहा कि पार्टी इस मामले में कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर लड़ाई लड़ेगी।

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वहीं, चुनाव आयोग पहुंचे कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि वे आयोग को अपनी शिकायत सौंपने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिनिधिमंडल को अनावश्यक रूप से रोका गया। (Meenakshi Natarajan Nomination Rejection Reasons) जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में ऐसा व्यवहार पहले कभी नहीं देखा। गौरतलब है कि राज्यसभा की द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदान 18 जून को होना है। इस बीच मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को लेकर विवाद राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

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Q1. मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों खारिज किया गया?

Ans: भाजपा के अनुसार लंबित मामले की जानकारी नामांकन पत्र में नहीं दी गई थी।

Q2. कानूनी विशेषज्ञों की इस मामले पर क्या राय है?

Ans: उनका कहना है कि सभी लंबित मामलों का उल्लेख नामांकन फॉर्म में जरूरी होता है।

Q3. कांग्रेस अब आगे क्या कदम उठा सकती है?

Ans: कांग्रेस चुनाव आयोग से पुनर्विचार और अदालत में कानूनी चुनौती दे सकती है।