भोपाल, 21 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चुनौती दी कि वह परिसीमन की कवायद का इंतजार करने के बजाय मौजूदा 543 लोकसभा सीट पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करके महिला आरक्षण कानून को तत्काल लागू करें।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी सरकार पर तीन साल तक इसे लागू करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में विफल नहीं हुआ था, बल्कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था और आज भी कानून बना हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘मोदी जी, आपके पास एक और मौका है। यदि आप वास्तव में अपनी महिला विरोधी छवि को सुधारना चाहते हैं, तो मौजूदा 543 सीट पर महिलाओं के लिए आरक्षण की कांग्रेस की मांग को स्वीकार करें। इस कानून को आगामी मानसून सत्र में लागू किया जाना चाहिए, और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को भी एक तिहाई हिस्सा मिलना चाहिए।’
वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाला संविधान संशोधन विधेयक 17 अप्रैल को संसद के निचले सदन में पारित नहीं हो सका। संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, 2026 पर मतों के विभाजन के दौरान पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े।
लोकसभा में किसी भी संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
नायक ने कहा, ‘इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोदीजी रास्ते में कितनी भी बाधाएं डाल दें, चाहे वह कितनी भी अगर-मगर क्यों न लगाएं, कांग्रेस और उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेता राहुल और प्रियंका गांधी इस बात पर अड़े हुए हैं कि वे महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करेंगे।’
उन्होंने कहा कि पार्टी दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं को आरक्षण के अधिकार से वंचित नहीं होने देगी। नायक ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक संसद में विफल नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, ‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संसद में विधेयक विफल नहीं हुआ है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में सर्वसम्मति से पारित किया गया था। यह आज भी कानून बना हुआ है। बात सिर्फ इतनी है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसे लागू नहीं होने दे रहे हैं।’
उन्होंने कहा कि आरक्षण के प्रति मोदी सरकार की गंभीरता इस तथ्य से स्पष्ट है कि उसने तीन साल पहले पारित महिला आरक्षण विधेयक के लिए 16 अप्रैल को रात 9.55 बजे अधिसूचना जारी की।
नायक ने कहा, ‘इसका मतलब है कि मोदी सरकार तीन साल से सो रही थी और महिला आरक्षण पर रोक लगाए हुई थी। अचानक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल चुनावों के बीच, वह अपनी नींद से जाग जाती है और एक विशेष बैठक बुलाती है।’
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह महिला आरक्षण विधेयक नहीं था जिसे संसद में विफल किया गया था, बल्कि यह संविधान संशोधन विधेयक था, जिसे देश को विभाजित करने के लिए पेश किया गया था।
नायक ने कहा कि कांग्रेस ऐसी परिसीमन कवायद नहीं होने देगी जो दक्षिणी, पूर्वोत्तर राज्यों और छोटे राज्यों का हिस्सा या दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग समुदायों की महिलाओं के हिस्से को ‘चुरा’ ले।
कांग्रेस नेता ने पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के एक लेख का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि जब भी लोकसभा सीट की संख्या बढ़ाने के लिए परिसीमन किया जाता है, तो सभी राज्यों की हिस्सेदारी ‘राजनीतिक निष्पक्षता’ के साथ निर्धारित की जानी चाहिए, न कि केवल अंकगणित के आधार पर।
यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए आगामी राज्यसभा चुनाव में मध्यप्रदेश से किसी महिला सदस्य को राज्यसभा भेजेगी, उन्होंने कहा, ”मुझे राज्यसभा की उम्मीदवारी पर फैसला करने का अधिकार नहीं है, लेकिन निश्चित रूप से यह एक अच्छा सुझाव है।’
भाषा ब्रजेन्द्र अमित
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