दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग की

Ads

दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग की

  •  
  • Publish Date - March 8, 2026 / 07:59 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 07:59 PM IST

भोपाल, आठ मार्च (भाषा) कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को ‘ज्योग्राफिकल इंडिकेशन’ (जीआई) टैग देने की मांग की और कहा कि यदि इस संबंध में जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन किया जाएगा।

जीआई टैग मुख्य रूप से कृषि उत्पादों, हस्तशिल्प और खाद्य वस्तुओं को उनकी भौगोलिक उत्पत्ति और विशिष्ट गुणवत्ता के आधार पर दिया जाता है। यह टैग उत्पाद की पहचान और विशेषता की गारंटी देता है, जिससे किसान और उत्पादक अपने उत्पाद का उचित मूल्य प्राप्त कर सकते हैं।

सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि कई वर्षों से मध्यप्रदेश के किसान राज्य के 14 जिलों में उत्पादित उच्च गुणवत्ता वाले बासमती चावल को जीआई टैग देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार इस मुद्दे पर उदासीन बनी हुई है।

उन्होंने श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, गुना, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा, होशंगाबाद, नरसिंहपुर और जबलपुर जिलों का उल्लेख किया।

सिंह ने कहा, “यह अत्यंत आश्चर्यजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस विषय पर तीन महीने पहले पत्र लिखने के बावजूद केंद्र और राज्य सरकारों ने किसानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इस टैग के अभाव में मध्यप्रदेश के किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।”

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा उठाया था।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने मध्यप्रदेश की बासमती को जीआई टैग दिया था, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने वर्ष 2016 में इसे वापस ले लिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के बासमती चावल को जीआई टैग का लाभ मिल रहा है, जबकि मध्यप्रदेश के किसानों को इससे वंचित रखा गया है।

सिंह ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों के मिल मालिकों और व्यापारिक लॉबी के दबाव में मध्यप्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में उत्पादित बासमती चावल को कम कीमत पर खरीदा जा रहा है और अन्य राज्यों के चावलों को जीआई टैग के नाम पर विदेशों में निर्यात किया जा रहा है, जिससे कंपनियां और व्यापारी भारी मुनाफा कमा रहे हैं जबकि किसानों को नुकसान हो रहा है।

सिंह ने कहा, ‘‘मध्यप्रदेश में बासमती चावल की खेती 100 वर्षों से अधिक समय से की जा रही है और इसका उल्लेख ब्रिटिश कालीन गजेटियर में भी मिलता है। राज्य की जलवायु और मिट्टी के कारण यहां उत्पादित बासमती चावल की सुगंध और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है और अमेरिका, कनाडा, यूरोप और पश्चिम एशिया में इसकी मांग अधिक है।’’

उन्होंने पाकिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने अपने बासमती चावल के लिए जीआई टैग वाले जिलों की संख्या 14 से बढ़ाकर 48 कर दी है और वर्ष 2030 तक 21 अरब डॉलर के निर्यात बाजार का लक्ष्य रखा है।

उन्होंने कहा, “यदि भारत ने किसानों के हित में समय रहते निर्णय नहीं लिया तो अंतरराष्ट्रीय बासमती बाजार में देश की स्थिति कमजोर हो सकती है।”

सिंह ने आरोप लगाया, ‘‘कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के कुछ अधिकारी मध्यप्रदेश के किसानों के हितों के खिलाफ काम कर रहे हैं और प्रधानमंत्री को उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।’’

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो वह किसानों के साथ आंदोलन का नेतृत्व करेंगे।

भाषा दिमो खारी

खारी