चीनी सुपरकंप्यूटर अमेरिकी मशीनों को पछाड़कर 2017 के बाद पहली बार दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर बना

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चीनी सुपरकंप्यूटर अमेरिकी मशीनों को पछाड़कर 2017 के बाद पहली बार दुनिया का सबसे तेज कंप्यूटर बना

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 08:59 AM IST,
    Updated On - June 24, 2026 / 08:59 AM IST

वाशिंगटन, 24 जून (एपी) चीन का एक सुपरकंप्यूटर अमेरिकी मशीनों को पछाड़कर अब दुनिया का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर बन गया है।

वर्ष 2017 के बाद यह पहला मौका है जब किसी चीनी कंप्यूटर ने उस सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है जिसे प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में किसी देश की क्षमता के पैमाने के रूप में भी अकसर देखा जाता है।

चीन के शेनझेन में स्थित ‘लाइनशाइन’ कंप्यूटर ने मंगलवार को घोषित ‘टॉप500’ कंप्यूटर की रैंकिंग के हालिया संस्करण में अमेरिकी कंप्यूटर ‘एल कैपिटन’ को पछाड़ दिया।

‘टॉप500’ परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों ने बताया कि चीन के राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र में स्थित ‘लाइनशाइन’ कंप्यूटर ने 2.198 एक्साफ्लॉप्स की क्षमता हासिल की है। इसका अर्थ है कि यह प्रति सेकंड दो क्विंटिलियन (10 की घात 18) से अधिक गणनाएं कर सकता है।

अमेरिकी सरकार की कैलिफोर्निया स्थित ‘लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी’ का ‘एल कैपिटन’ अब दूसरे स्थान पर है। इसके बाद टेनेसी और इलिनॉय की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में स्थित दो अन्य अमेरिकी सुपरकंप्यूटर का स्थान है। जर्मनी का ‘जुपिटर’ सुपरकंप्यूटर खिसककर पांचवें स्थान पर आ गया है।

ये पांचों दुनिया के एकमात्र ऐसे ‘एक्सास्केल’ कंप्यूटर हैं, जिनकी क्षमता की सार्वजनिक रूप से पुष्टि की गई है। एक्सास्केल कंप्यूटर ऐसा सुपरकंप्यूटर होता है, जो प्रति सेकंड कम से कम एक क्विंटिलियन गणनाएं कर सकता है।

‘लाइनशाइन’ अन्य उच्च क्षमता वाले कंप्यूटरों से इस मायने में अलग है कि यह कृत्रिम मेधा के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली ‘ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट’ (जीपीयू) के बजाय पूरी तरह पारंपरिक कंप्यूटर चिप या ‘सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट’ (सीपीयू) पर चलता है।

‘टॉप500’ के अनुसार, इसे संचालित करने के लिए करीब 42.2 मेगावाट बिजली की जरूरत होती है।

एपी सिम्मी खारी

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