हार का हिसाब…निशाने पर कौन-कौन…आगामी चुनाव में पार्टी के भीतर की ये तकरार हार का सबब तो ना बन जाएगी?

हार का हिसाब...निशाने पर कौन-कौन...! Dispute Between Congress Leader Former State President Upset to Party

हार का हिसाब…निशाने पर कौन-कौन…आगामी चुनाव में पार्टी के भीतर की ये तकरार हार का सबब तो ना बन जाएगी?
Modified Date: November 29, 2022 / 08:30 pm IST
Published Date: December 10, 2021 11:22 pm IST

भोपाल: Dispute Between Congress Leader कांग्रेसी खेमें में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव गुट की सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है। अरूण यादव ने खरगोन के खलघाट में एक बड़े आयोजन की तैयारी की है, जिसे यादव भाईयों की नाराजगी के चलते शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, यादव बंधुओँ ने सोशल मीडिया पर कैंपेन शुरू किया है ‘चलो खलघाट’। इसी तैयारी के बीच कांग्रेस नेतृत्व ने खंडवा शहर, खंडवा ग्रामीण, बुराहनपुर शहर और बुराहनपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया, जिससे बाद बीजेपी कांग्रेस पर गुटबाजी के आरोपों के साथ हमलावर है तो कांग्रेस पार्टी सफाई और बचाव की मुद्रा में है। सवाल ये है कि क्या आगामी चुनाव में पार्टी के भीतर की ये तकरार विरोधियों जीत और पार्टी के हार का सबब तो ना बन जाएगी?

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Dispute Between Congress Leader मध्यप्रदेश में बीते दिनों 4 सीटों पर हुए उप चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद खंडवा और बुरहानपुर में कांग्रेस संगठन ने कई बदलाव किए, जिसमें सबसे ज्यादा चर्चा में है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव के समर्थक चार अध्यक्षों का बदला जाना। वैसे पिछले काफी समय से प्रदेश कांग्रेस इकाई में अरुण यादव को लेकर मतभेद की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। खंडवा लोकसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान भी ऐन वक्त पर अरूण यादव ने अपनी दावेदारी से हाथ पीछे खींच लिए और बाद में उपचुनाव के प्रचार के दौरान कई दफा खुले मंचों से अपना दर्द बयां कर अपनी ही पार्टी को मुश्किलों में डाला। अब जबकि यादव खलघाट में एक बड़ा आयोजन कर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में हैं, तो इसके ठीक पहले कांग्रेस नेतृत्व ने अरुण यादव के बेहद करीबी खंडवा-बुरहानपुर के जिला अध्यक्षों को हटा दिया है जिससे पार्टी में गुटबाजी और अंदरूनी तकरार के दौर पर देखा जा रहा है। हालांकि कांग्रेस इसे सामान्य प्रक्रिया बता रही है।

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अरूण और सचिन यादव के पिता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे सुभाष यादव ने भी 23 साल पहले दिग्विजय सिंह की कार्यशैली से नाराज होकर खलघाट में ही एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया था। अब भी खलघाट के आयोजन को यादव भाईयों की नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसके बारे में फिलहाल अरुण यादव मौन हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर पार्टी नेताओं को दरकिनार कर खुद के फोटो के साथ कैंपेन की शुरुआत कर उन्होंने ये जताने की कोशिश की है कि मालवा-निमाड़ में वही कांग्रेस का चेहरा हैं। जाहिर है इस पूरे घटनाक्रम ने बीजेपी को कांग्रेस पर गुटबाजी के मुद्दे पर हमला बोलने का मौका दे दिया है।

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अरुण यादव की नाराजगी, नेताओं को दरकिनार कर खलघाट में ताकत के प्रदर्शन की तैयारी के बीच उनके समर्थको पर कार्रवाई कर कांग्रेस आलाकमान ने सख्ती का संदेश दे दिया है। लेकिन बड़ा सवाल ये पंचायत चुनाव में सभी नेताओं की एकजुटता की जरूरत के वक्त कांग्रेस के भीतर की ये तल्खी और खींचतान क्या पार्टी को बड़ा नुक्सान तो नहीं पहुंचा पाएगी।

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