इंदौर (मप्र), सात अप्रैल (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल के कारण स्वजनों को खोने वाले लोगों ने मंगलवार को नगर निगम के बजट सम्मेलन में धावा बोला और स्थानीय प्रशासन के प्रति आक्रोश जताते हुए दावा किया कि उन्हें अब तक सरकारी मुआवजा नहीं मिला है।
चश्मदीदों ने बताया कि भागीरथपुरा के पीड़ित नागरिक कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के साथ सम्मेलन में पहुंचे और दर्शक दीर्घा में जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए पोस्टर लहराए। इससे सम्मेलन में कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई।
प्रदर्शनकारियों में शामिल सोनाली कदम ने संवाददाताओं से कहा,‘‘मेरी सास की दूषित पेयजल से पिछले साल दिसंबर में मौत हुई थी। गुजरे चार महीनों में तमाम आश्वासन दिये जाने के बावजूद मेरे परिवार को दो लाख रुपये का सरकारी मुआवजा अब तक नहीं मिला है।’’
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने दूषित पेयजल त्रासदी को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए लोगों की मौत पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा,‘‘भागीरथपुरा में पेयजल और ड्रेनेज की नयी लाइन डालने का काम तेजी से चल रहा है। दूषित पेयजल से जिन लोगों की मौत हुई है, उनके परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी।’’
उन्होंने नगर निगम के बजट सम्मेलन में दूषित पेयजल त्रासदी पर हंगामे को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और आरोप लगाया कि यह पार्टी हमेशा लाशों पर राजनीति करती आई है।
भार्गव ने कहा,‘‘कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के सम्मेलन में उस वक्त शर्मनाक हंगामा किया, जब हम भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से मरने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दे रहे थे।’’
अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त का प्रकोप पिछले साल दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था।
स्थानीय लोगों और कांग्रेस ने इस प्रकोप में अब तक कुल 36 लोगों की मौत का दावा किया है।
बहरहाल, इस मामले पर विधानसभा में 19 फरवरी को मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई है और हर मृतक के परिजनों को दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग दूषित पेयजल त्रासदी की जांच कर रहा है।
भाषा हर्ष
राजकुमार
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