Meenakshi Natarajan Nomination Case: मीनाक्षी नटराजन नामांकन मामले में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, चुनाव आयोग ने खारिज की याचिका

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मिनाक्षी नटराजन नामांकन मामले में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, Election Commission dismissed Congress's petition

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  • Publish Date - June 10, 2026 / 05:22 PM IST,
    Updated On - June 10, 2026 / 08:52 PM IST

CG Congress News || Image- IBC24

भोपालः Meenakshi Natarajan Nomination Case: मध्य प्रदेश में राज्यसभा की कांग्रेस प्रत्याशी मिनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनाव आयोग पहुंची कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। चुनाव आयोग ने कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी है। अब कांग्रेस के पास केवल सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता बचा हुआ है। दरअसल, राज्यसभा नामांकन में फॉर्म-26 में मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना में लंबित मामले में की जानकारी नहीं दी और मध्य प्रदेश में रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन रद्द कर दिया। इस पर कांग्रेस का कहना है कि चुनाव कानून के मुताबिक केवल उन्हीं मामलों का खुलासा करना जरूरी होता है जिसमें आरोप तय हो चुके हों और 2 साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान हो। इन्हीं दलीलों के साथ कांग्रेस ने चुनाव आयोग का रूख किया था, लेकिन उन्हें वहां से भी निराशा हाथ लगी है। चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को सही मानते हुए कांग्रेस की याचिका को खारिज कर दिया है।

तेलंगाना से जुड़े उस अदालती मामले को जानिए (Meenakshi Natarajan Nomination Case)

Meenakshi Natarajan Nomination Case: जिस मामले में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ, उसकी पूरी कहानी उनके एक करीबी सहयोगी ने साझा की है। दरअसल, 2023 के तेलंगाना विधानसभा चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को पर्यवेक्षक बनाया गया था। तब नारायणपेट विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट के प्रबल दावेदार एक नेता के ख़िलाफ़ एक महिला ने उन तक शिकायत पहुंचाई थी। मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए मीनाक्षी ने पार्टी से उस नेता का टिकट काटने का अनुरोध किया था। बाद में टिकट उसी नेता के परिवार से एक महिला को मिला, जिन्होंने चुनाव में जीत दर्ज की। इसके बाद जब मीनाक्षी को राज्य का प्रभारी बनाया गया, तो शिकायतकर्ता महिला अपने पुराने मामले में मीनाक्षी नटराजन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाने लगी। वह कभी मांग करती कि उस नेता को पार्टी से निकाले जाने का सबूत दिया जाए, तो कभी सवाल उठाती कि महिला विधायक को पार्टी महासचिव क्यों बनाया गया।

 

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