Reported By: Vivek Pataiya
,Waqf Board News/Image Credit: Meta AI
Waqf Board News: भोपाल: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को नियम कायदे को ताक पर रख कर किराए पर देने में ढाई करोड़ रुपए की आर्थिक अनियमितता सामने आई है। इस मामले में ईओडब्ल्यू ने बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष समेत तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। दरअसल वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को किराए पर देने में गड़बड़ी के बारे में उप सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग ने ईओडब्ल्यू को 27 जुलाई 2023 को जांच रिपोर्ट और दस्तावेजों केआधार पर शिकायत की थी। इसमें वक्फ बोर्ड की औकाफ आम्मा संपत्तियों को वक्फ अधिनियम 1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम 2014 का उल्लंघन करते हुए लीज पर देने के साथ ही बिना अनुमति निर्माण कार्य की मंजूरी भी दे दी गई।
Waqf Board News: इस पर ईओडब्ल्यू ने 3 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक जांच शुरू की, जिसमें सामने आया कि प्रदेशभर में 185 संपत्तियों को किराये पर दिया गया, उनका क्षेत्रफल 83 हजार वर्गफुट है। कलेक्टर की गाइडलाइन के अनुसार इन संपत्तियों की कीमत करीब 59 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। ऐसे में नियमों के मुताबिक इनसे हर साल 2 करोड़ 98 लाख रुपये किराया मिलना चाहिए था, बावजूद सिर्फ 21 लाख रुपए ही किराया मिला। वक्फ बोर्ड ने 14 अगस्त 2013 को आगामी पांच वर्षों के लिए 11 सदस्यीय इंतजामिया कमेटी औकाफ आम्मा, भोपाल का गठन किया था।
Waqf Board News: इसके अध्यक्ष शौकत मोहम्मद खान और सचिव फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर बनाए गए थे। इस समिति के गठन आदेश में शर्तें थीं कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बिना किसी भी वक्फ संपत्ति को न तो लीज पर दिया जा सकता है, न बेचा जा सकता है, न ही किसी अन्य रूप में हस्तांतरित किया जा सकता है।साथ ही वक्फ संपत्ति में कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। इसके बाद 2013 से 2018 के बीच, वक्फ बोर्ड की 185 संपत्तियों में किरायेदारी बदली गई। इसको कागजों में किरायेदारी परिवर्तन बताया गया, जबकि असलियत में पुराने किरायेदारों को हटाकर नए लोगों को नए पट्टे (लीज) दिए गए।
Waqf Board News: यह बिना सार्वजनिक सूचना, बिना आवेदन और बिना वक्फ बोर्ड की स्वीकृति की गई। जहां नियमों के अनुसार पहले पुरानी किरायेदारी को सरेंडर कर नई प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी, वहां सीधे नाम बदलकर संपत्तियां दे दी गईं। कुछ मामलों में किरायेदारी बदलने के लिए ब्लड रिलेशन का आधार भी दिखाया गया, जो जांच में सही नहीं पाया गया। ईओडब्ल्यू ने जांच पूरी होने के बाद तत्कालीन वक्फ बोर्ड चेयरमैन शौकत मोहम्मद सहित फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग), 420 (धोखाधड़ी), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और 13(2) के अंतर्गत एफआईआर दर्ज की है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए ईओडब्ल्यू की टीमें लगी हुई हैं।
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