रायसेन (मध्यप्रदेश), 11 अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यदि युवा इसमें जुड़ते हैं तो नवाचार बढ़ेगा, किसानों की आय में वृद्धि होगी और देश की अर्थव्यवस्था सशक्त होगी।
यहां आयोजित तीन दिवसीय ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ के मुख्य अतिथि के रूप में अपने संबोधन में सिंह ने कहा, ‘‘युवाओं के पास ज्ञान, ऊर्जा और नवाचार की क्षमता है, जिसे कृषि की ओर भी मोड़ने की आवश्यकता है। ड्रोन, सेंसर और मोबाइल तकनीक के जरिए खेती को ‘स्मार्ट’ बनाया जा सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार भी इस दिशा में हर संभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि खेती आने वाले समय में गर्व का विषय बने और हमारे किसान अपनी पूरी आन, बान, शान और सम्मान के साथ जीवन जिएं।’’
देश के कृषि मंत्री रह चुके सिंह ने कहा कि देश के युवा आज हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और तकनीक और नवाचार में उनका योगदान सराहनीय है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह गर्व की बात है कि भारतीय युवा वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं।’’
सिंह ने किसान के खेत से बाजार तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वह सिर्फ अन्न नहीं उगाता, वह पूरी अर्थव्यवस्था को उगाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वह रोजगार को उगाता है। उद्योग को उगाता है। सेवाओं को उगाता है।’’
सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने के लिए सेनाओं में पिछले कुछ वर्षों में मोटे अनाजों को बढ़ावा दिया है और इसके जरिए ज्वार, बाजरा और रागी के आटे को अपनी सेनाओं के लिए उपलब्ध कराना शुरू किया है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में छावनी क्षेत्र के आसपास के किसानों की आय में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हुई है और सबसे अच्छी बात यह है कि इससे किसानों को जैविक खेती के लिए भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने प्रयासों से ‘जय जवान – जय किसान’ के नारे को फिर से चरितार्थ कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार ने छावनी इलाकों के आसपास रहने वाले किसानों से ही जैविक खेती वाले फल और सब्जियां खरीदने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यानी आप किसान भाई अपने खेतों में जैविक तरीके से (बिना किसी रासायनिक खाद का इस्तेमाल किए) जो सब्जियां और फल उगाएंगे, वह सीधे हमारे जवानों की थाली में पहुंचेगा। इससे आपको फायदा होगा क्योंकि आपकी पैदावार को हमारे सैनिकों तक पहुंचाया जाएगा और इससे आपको अच्छी कीमत मिलेगी।’’
भाषा ब्रजेन्द्र नेत्रपाल संतोष
संतोष