इंदौर में दूषित पेयजल से 25वीं मौत का दावा, स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर को बताया ‘वास्तविक कारण’

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इंदौर में दूषित पेयजल से 25वीं मौत का दावा, स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर को बताया 'वास्तविक कारण'

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  • Publish Date - January 21, 2026 / 08:32 PM IST,
    Updated On - January 21, 2026 / 08:32 PM IST

इंदौर (मध्यप्रदेश), 21 जनवरी (भाषा) इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के प्रकोप के दौरान 50 वर्षीय ई-रिक्शा चालक की मौत हो गई है।

हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने दूषित पेयजल से इस व्यक्ति की मौत को लेकर उसके परिवार के दावे को खारिज करते हुए कैंसर को उसकी मृत्यु का ‘वास्तविक कारण’ बताया है।

अधिकारियों ने बताया कि भागीरथपुरा में रहने वाले हेमंत गायकवाड़ (50) ने शहर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार रात दम तोड़ा।

इस मामले को मिलाकर स्थानीय लोगों ने भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से फैले उल्टी-दस्त के चलते अब तक कुल 25 लोगों की मौत का दावा किया है। प्रशासन ने इस दावे की पुष्टि नहीं की है।

हेमंत गायकवाड़ के छोटे भाई संजय ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा,‘‘मेरे भाई की मौत दूषित पानी के कारण हुई है। हमने महज 15 दिन की बीमारी के कारण उन्हें खो दिया। उन्होंने एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार रात आखिरी सांस ली।’’

उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई ई-रिक्शा चलाते थे और अपने परिवार के लिए आजीविका कमाने वाले इकलौते सदस्य थे।

संजय ने कहा कि मृतक के परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और राज्य सरकार को उसकी हरमुमकिन मदद करनी चाहिए।

शोक में डूबे इस व्यक्ति ने संयत, लेकिन दृढ़ स्वर में कहा,‘‘मेरे भाई की मौत के गुनाहगारों को सजा मिलनी चाहिए।’’

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने कहा कि चिकित्सकों के मुताबिक हेमंत की मौत ‘कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट’ के बाद हुई।

सीएमएचओ ने कहा,‘‘हेमंत कैंसर से पहले ही पीड़ित थे और इस बीमारी का इलाज भी करा रहे थे। इन हालात में उनकी मृत्यु का वास्तविक कारण कैंसर है।’’

‘कार्डियोपल्मोनरी अरेस्ट’ वह स्थिति है, जब हृदय की धड़कन और श्वसन दोनों अचानक बंद हो जाते हैं जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, विशेषकर मस्तिष्क तक ऑक्सीजन और रक्त नहीं पहुंच पाता।

भागीरथपुरा में बुधवार सुबह जब हेमंत के घर से उनकी अर्थी उठी, तो माहौल गमगीन हो गया और विलाप में डूबी उनकी मां, पत्नी और चार बेटियों को संभालना वहां मौजूद लोगों के लिए मुश्किल हो गया।

उनकी 12 वर्षीय बेटी मनाली ने अपने एक रिश्तेदार की मदद से पिता की चिता को मुखाग्नि दी। मनाली, हेमंत की सबसे छोटी बेटी है।

हेमंत की बड़ी बेटी रिया ने बताया,‘‘मेरे पिता को दूषित पानी के चलते दस्त की समस्या हुई थी और हमने उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें दूसरे निजी अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई।’’

भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। हालांकि, इस इलाके के लोगों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से दूषित पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है और नगर निगम से कई शिकायतें करने के बावजूद इसका निराकरण नहीं हो सका।

अधिकारियों के मुताबिक भागीरथपुरा में 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया के बारे में पता चला। अधिकारियों ने कहा कि इस बैक्टीरिया के कारण भागीरथपुरा में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए।

उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा में नगर निगम की पेयजल पाइपलाइन में रिसाव के कारण इसमें एक शौचालय के सीवर का पानी भी मिला था।

राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 15 जनवरी को पेश स्थिति रिपोर्ट में इस प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया था।

मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति द्वारा किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है।

प्रशासन ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया है।

अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

भाषा हर्ष नोमान

नोमान