Anganwadi Workers Regularization. Image Source- IBC24 Archive
जबलपुरः Anganwadi Workers Regularization मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन और लाभ देने की मांग की गई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता संघ ने जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि सरकार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से काम तो पूरा लेती है लेकिन सरकारी कर्मचारियों के मुकाबले उन्हें बहुत कम मानदेय दिया जाता है। याचिका में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए समान काम, समान वेतन के संवैधानिक सिद्धांत का पालन ना होने को चुनौती दी गई है। मामले पर सुनवाई करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगते हुए 17 फरवरी को मामले पर अगली सुनवाई तय की है।
दरअसल, हाईकोर्ट जबलपुर में मध्य प्रदेश आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की महासचिव संगीता श्रीवास्तव द्वारा एक याचिका दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ‘तृतीय श्रेणी सरकारी कर्मचारी’ (Class-3 Employee) का दर्जा दिया जाए। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका स्वीकार करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव सहित अन्य संबंधितों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
Anganwadi Workers Regularization संगीता श्रीवास्तव की याचिका में कहा गया था कि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और सामाजिक कल्याण योजनाओं का संचालन कर रही हैं। राज्य शासन द्वारा इन कार्यकर्ताओं को शासकीय सेवक की तरह अतिरिक्त कार्यबल के रूप में इस्तेमाल कर उन्हें बीएलओ, जनगणना जैसे अतिरिक्त कर्तव्यों का दायित्व दिया जाता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दशकों से राज्य को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए नियमित कैडर सृजित नहीं करते हुए उनका शोषण किया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता दशकों से राज्य को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे है। याचिका में राहत चाही गई थी कि, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नियमित कैडर के सरकारी कर्मचारियों के समान सुविधाओं और लाभों पाने के हकदार हैं। समान काम के लिए समान वेतनमान का हक प्रदान करते हुए उन्हें तृतीय श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। राज्य को उनकी सेवाओं की नियमित आवश्यकता है, लेकिन इन नियमित कैडर सृजित नहीं कर उनका शोषण किया जा रहा है।