रायपुर। Raipur Commissioner System Notification: राजधानी रायपुर में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कमिश्नर प्रणाली लागू की जा रही है। राज्य सरकार ने इसे लेकर आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। रायपुर शहर के 21 थाना क्षेत्रों को RDPCS (Raipur District Police Commissionerate System) में शामिल किया गया है। वहीं रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के 12 थानों को भी इस प्रणाली में शामिल किया गया है, लेकिन यहां ग्रामीण एसपी की तैनाती की जाएगी।
सिविल लाइन, देवेंद्र नगर, तेलीबांधा, कोतवाली, गंज, मौदहापारा, गोल बाजार, पुरानी बस्ती, डीडी नगर, आमानाका, आजाद चौक, सरस्वती नगर, कबीर नगर, राजेंद्र नगर, मुजगहन, टिकरापारा, उरला (नगर पालिक निगम बीरगांव के अंतर्गत आने वाला क्षेत्र), खमतराई, गुढ़ियारी, पंडरी, खम्हारडीह।
विधानसभा, धरसींवा, खरोरा, तिल्दा नेवरा, माना, मंदिर हसौद, आरंग, नवा रायपुर, राखी, अभनपुर, गोबरा नवापारा, उरला (नगर पालिक निगम बीरगांव के बाहर आने वाला क्षेत्र)।
Commissionrate System by Deepak Sahu
Raipur Commissioner System Notification: गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली लागू करने के लिए अक्टूबर महीने में एक प्रारूप तैयार किया गया था। यह प्रारूप एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा तैयार किया गया था और इसे राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अरुण देव गौतम को सौंपा गया था। नई प्रणाली लागू होने के बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) और सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की भी तैनाती की जाएगी। पुलिस कमिश्नर के बाद दूसरा महत्वपूर्ण पद ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर का होता है। ऐसे में मौजूदा एसएसपी लाल उमेद सिंह के नाम पर मुहर लग सकती है।
पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था में पुलिस आयुक्त सर्वोच्च प्रशासनिक पद होता है। यह व्यवस्था आमतौर पर महानगरों में लागू होती है और इसकी शुरुआत अंग्रेजों के शासनकाल में हुई थी। पहले यह व्यवस्था कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास जैसे प्रेसीडेंसी शहरों में लागू थी, जिन्हें बाद में महानगरीय शहर कहा जाने लगा। इन शहरों में पुलिस व्यवस्था तत्कालीन आधुनिक पुलिस प्रणाली के समान थी। देश के अन्य हिस्सों में पुलिस व्यवस्था भारतीय पुलिस अधिनियम, 1861 पर आधारित रही है और आज भी अधिकांश शहरों में यही प्रणाली लागू है। इस अधिनियम के भाग-4 के तहत जिला अधिकारी (डीएम) के पास पुलिस पर नियंत्रण से जुड़े कुछ अधिकार होते हैं। इसके अलावा दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत कार्यकारी मजिस्ट्रेट को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ शक्तियां दी गई हैं। साधारण शब्दों में कहा जाए तो पुलिस अधिकारी स्वतंत्र रूप से निर्णय नहीं ले सकते और उन्हें डीएम, संभागीय आयुक्त या शासन के आदेशों के तहत कार्य करना पड़ता है। लेकिन पुलिस आयुक्त सिस्टम लागू होने के बाद ये अधिकार सीधे पुलिस अधिकारियों को मिल जाते हैं, जिससे वे कानून-व्यवस्था से जुड़े फैसले तेजी से ले सकते हैं।