इंदौर, एक जून (भाषा) देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में नगर निगम की ओर से पाइपलाइन के जरिये घर-घर पहुंचाए जा रहे अधिकांश पेयजल के ‘दूषित’ होने के कांग्रेस के दावे को गलत बताते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने सोमवार को एक मकान का दौरा कर वहां नल का पानी पिया।
भार्गव ने कांग्रेस पर साजिशन झूठ फैलाने का आरोप भी लगाया।
कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 29 मई को दावा किया था कि पार्टी की ओर से शहर के 85 वार्ड में से 29 से लिए गए पेयजल के 240 नमूनों में से करीब 98 फीसदी जांच में दूषित पाए गए हैं।
पटवारी ने कहा था कि जांच के दौरान पानी में ई-कोलाई और कोलीफॉर्म जैसे जीवाणुओं की मौजूदगी मिली, वहीं कैल्शियम कार्बोनेट, क्लोराइड और सल्फेट समूह के रासायनिक पदार्थ निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक मात्रा में पाए गए।
महापौर भार्गव शहर के सुदामा नगर क्षेत्र पहुंचे और स्थानीय लोगों के बीच सार्वजनिक रूप से नल का पानी पीकर कांग्रेस के दावे को चुनौती दी।
भार्गव ने कहा, “पटवारी का झूठ जनता के सामने आ चुका है। जिस सुदामा नगर क्षेत्र के पानी को वह जहरीला बता रहे थे, उस पानी को मैंने लोगों के बीच सार्वजनिक रूप से पिया है।”
उन्होंने पेयजल की गुणवत्ता से जुड़ी कांग्रेस की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि प्रमुख विपक्षी दल शहर की छवि खराब करने की साजिश के तहत झूठ फैला रहा है।
भार्गव ने कहा, “पटवारी ने शहर से पेयजल के 240 नमूने एकत्र करने का दावा किया था, लेकिन रिपोर्ट में केवल 130 लोगों के नाम का जिक्र है, जिनके घरों से नमूने लिए गए थे। अगर कांग्रेस बाकी लोगों के नाम भी उपलब्ध कराती है, तो हम उनके घरों के पेयजल की भी जांच करा लेंगे।”
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के दौरान उल्टी-दस्त का प्रकोप सामने आने के बाद से पेयजल की गुणवत्ता का मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। स्थानीय लोगों और कांग्रेस का दावा है कि दूषित पेयजल के कारण इस इलाके में 36 लोगों की मौत हुई।
हालांकि, इस मामले पर विधानसभा में हंगामे के बीच 19 फरवरी को हुई चर्चा के दौरान राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा था कि भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण 22 लोगों की मौत हुई और हर मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
भागीरथपुरा प्रकरण की न्यायिक जांच मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सुशील कुमार गुप्ता की अगुवाई वाला एक सदस्यीय आयोग कर रहा है। उच्च न्यायालय ने आयोग को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए 14 जून तक की मोहलत दी है।
भाषा
हर्ष पारुल
पारुल