CM Mohan Yadav Jabalpur Visit / Image Source : file
जबलपुर : CM Mohan Yadav Jabalpur Visit मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में कल एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज रात 8:35 बजे जबलपुर पहुंचेंगे, जहां वे रात्रि विश्राम करेंगे। कल सुबह मुख्यमंत्री जबलपुर से बालाघाट के लिए रवाना होंगे, जहां वे कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार रेंज में असम से लाए गए 4 जंगली भैंसों को उनके प्राकृतिक आवास में सॉफ्ट रिलीज करेंगे।मध्य प्रदेश और असम सरकार के बीच कुल 50 जंगली भैंसे लाने का करार हुआ है, जिसके पहले चरण की शुरुआत कल होने जा रही है।
बालाघाट एवं मण्डला जिले के अंतर्गत आने वाले कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार रेंज में करीब 45 वर्षों से विलुप्त जंगली भैंसा (एशियाई वाइल्ड बफैलो) एक बार फिर लौटने जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल की शुरुआत 28 अप्रैल को होगी, जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव स्वयं सूपखार पहुंचकर असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए 4 जंगली भैंसों को जंगल में छोड़ेंगे। ( Kanha Tiger Reserve Wild Buffalo )इनमें 03 मादा एवं 01 नर जंगली भैसा है। इस अवसर पर जिले के प्रभारी मंत्री उदय प्रताप सिंह, अन्य गणमान्य नागरिक एवं अधिकारी उपस्थित रहेंगें। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के प्रेरणादायक नेतृत्व में और आसाम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वा शरमा के सहयोग से मध्य प्रदेश वन विभाग की ओर से संरक्षण की दिशा में एक और ऐतिहासिक पहल की गई है, जिसमे प्रदेश में एक लुप्तप्राय प्रजाति (जंगली जल भैंसा) को उसके ऐतिहासिक क्षेत्र में पुनर्स्थापित करने की ऐतिहासिक संयुक्त पहल असम वन विभाग और मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा की गई है जिसमे आसाम के काजीरंगा बाघ अभ्यारण्य से कान्हा बाघ अभ्यारण्य में 50 एशियाई जंगली जल भैंस (बुबालस आर्नी) को पुनर्स्थापित किया जायेगा।
इस संयुक्त पहल का उद्देश्य इस विशाल शाकाहारी जंगली प्रजाति को मध्य भारत में उनके ऐतिहासिक निवास क्षेत्र में पुनः स्थापित करना है, जहाँ वे एक सदी से अधिक समय से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुके हैं और उनके प्राकृतिक चरने के व्यवहार का लाभ उठाकर कान्हा घास के मैदानों में लंबी घास की प्रजातियों का प्रबंधन करना और जैव विविधता को बढ़ाना है।काजीरंगा से ‘संस्थापक आबादी’ (founder population) के तौर पर कुल 50 जानवरों को स्थानांतरित किया जाना है, और 8 जानवर मॉनसून से पहले वहाँ पहुँचने वाले हैं। अंतर-राज्यीय सहयोग के इस महतवपूर्ण अभियान के प्रथम चरण में 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच, काजीरंगा के मध्य और पूर्वी क्षेत्रों से 7 किशोर भैंसों को पकड़ा गया। तत्पश्चात क्वारंटाइन प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने के लिए, पकड़े गए जंगली जल भैंसों को 1 हेक्टेयर के विशेष बोमा (बाड़े) में रखा गया। इस क्वारंटाइन पीरियड के दौरान भैंसों के स्वास्थ्य की निगरानी परिक्षण किया गया साथ ही परिवहन वाहनों में स्थानांतरण के दौरान भैंसों के संभावित तनाव को कम करने का प्रयास किया गया।
क्वारंटाइन प्रोटोकॉल पूर्ण होने के पश्चात जंगली भैंसों का स्थानांतरण 25 अप्रैल 2026 को 4 जंगली भैंसों ने काजीरंगा से कान्हा टाइगर रिज़र्व तक की अपनी 2000 किलो मीटर की यात्रा शुरू की है। इनका स्थानातरण काजीरंगा और कान्हा, दोनों जगहों के वरिष्ठ अधिकारियों और अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में किया जा रहा है, जो दिनांक 28 अप्रैल 2026 की कान्हा टाइगर रिज़र्व में पहुचेंगे। जिन्हें दिनांक 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री, डॉ मोहन यादव द्वारा सूपखार, कान्हा टाइगर रिज़र्व में स्थित बाड़े में सॉफ्ट रिलीज़ किया जाएगा। यह स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी यह प्रजाति उनके ऐतिहासिक क्षेत्र (कान्हा) में जैव विविधता को बढ़ावा देगा और कान्हा टाइगर रिज़र्व में घास के मैदानों वाले पारिस्थितिकी तंत्र के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उल्लेखनीय है कि कान्हा के सूपखार क्षेत्र में जंगली भैंसों को आखिरी बार वर्ष 1979 के आसपास देखा गया था, जिसके बाद यह प्रजाति यहां से पूरी तरह विलुप्त हो गई। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारियों, शिकार, आवास में कमी और मानव दबाव जैसे कारणों से इनकी संख्या लगातार घटती गई और अंततः इनका अस्तित्व समाप्त हो गया। अब वन विभाग द्वारा जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत इस प्रजाति को फिर से बसाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए काजीरंगा से चयनित भैंसों को लाकर सूपखार रेंज में अनुकूल वातावरण में छोड़ा जा रहा है। यह पहल न केवल जैव विविधता संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि कान्हा के पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कान्हा की घासभूमि, जल स्रोत और सुरक्षित वन क्षेत्र जंगली भैंसों के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं। ऐसे में यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में यहां जंगली भैंसों की स्थायी आबादी विकसित हो सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस दौरे को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे प्रदेश में विलुप्त हो चुकी प्रजातियों को पुनर्जीवित करने की संभावनाओं को नई गति मिलेगी।