भोपाल, 19 मार्च (भाषा) कांग्रेस ने बुधवार को मध्यप्रदेश की आर्थिक स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत सरकार पर निशाना साधा और कहा कि एक तरफ तो वह विकास के नाम पर ‘कर्ज पर कर्ज’ ले रही है, वहीं दूसरी ओर बजट की राशि को सही समय पर खर्च करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय सिंह ने दावा किया है कि वित्त वर्ष खत्म होने में मात्र 12 दिन बचे हैं, लेकिन सरकार अब भी बजट का 33 प्रतिशत यानी लगभग एक लाख 10 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई है।
उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पूरे साल हाथ पर हाथ धरे बैठी सरकार अब आखिरी पखवाड़े में इस भारी-भरकम राशि को अनाप-शनाप तरीके से ‘ठिकाने लगाने’ की तैयारी में है।
उन्होंने कहा, ‘यह सीधे तौर पर जनता के पैसे की बर्बादी और भ्रष्टाचार का संकेत है।’
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सिंह ने कहा कि राज्य की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि पिछले एक हफ्ते ही उसने 9,900 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है।
एक बयान में उन्होंने दावा किया कि प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ अब पांच लाख दस हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है और आने वाले समय में हर नागरिक पर कर्ज का भारी बोझ होगा।
उन्होंने कहा कि खुद नीति आयोग ने सरकार की बढ़ती उधारी और कम राजस्व वसूली पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा, ‘कृषि और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी बजट का पूरा उपयोग न होना सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है।’
प्रदेश को दिवालियापन की ओर धकेलने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि साल भर विकास कार्य ठप रहते हैं और मार्च के आखिरी दिनों में ‘बजट खपाने’ की होड़ मच जाती है।
उन्होंने कहा, ‘सरकार को श्वेत पत्र जारी कर बताना चाहिए कि आखिर जनता को कर्ज के दलदल में क्यों धकेला जा रहा है?’
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्वास्थ्य, लोक निर्माण, कृषि और नवकरणीय उर्जा जैसे प्राथमिकता वाले विभागों में बजट का औसतन लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा खर्च हुआ है।
इस बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि भाजपा की प्रदेश सरकार ने सिर्फ मार्च के महीने में 17 मार्च को तीसरी बार 4,100 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।
उन्होंने कहा कि इससे पहले तीन मार्च को 6,300 करोड़ और 10 मार्च को 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने कहा कि इस प्रकार चालू वित्त वर्ष के आखिरी महीने में भाजपा की मोहन यादव सरकार 16,200 करोड़ रुपये का कर्ज लेकर विकास का न सही, कर्ज का तो नया कीर्तिमान स्थापित कर ही चुकी है।
उन्होंने कहा, ‘इससे दो बात साफ हैं। पहली और बुनियादी बात यह है कि भाजपा सरकार ने प्रदेश को इस सीमा तक दिवालिया कर दिया है कि उसके पास एक महीना प्रशासन चलाने के लिए भी पैसा नहीं है। और वह इतनी दिशाविहीन है कि उसके पास एक महीने की भी योजना नहीं है, इसीलिए उसे एक महीने में ही तीन बार कर्ज लेने के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता है।”
माकपा नेता ने कहा है कि इसका दूसरा पहलू यह है कि ब सरकार को एक महीने में ही तीन बार कर्ज लेना है तो फिर 18 फरवरी को विधानसभा में प्रस्तुत बजट का क्या अर्थ है?
माकपा नेता ने कहा कि चिंता की बात यह है कि भाजपा सरकार की ‘दिशाहीनीता और भ्रष्ट नीतियों’ का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जो कर्ज ‘भ्रष्टाचार’ के कारण बढ़ रहा है, उसे प्रदेश की जनता को अपने पसीने की गाढ़ी कमाई से चुकाना पड़ेगा।
भाजपा प्रवक्ता नेहा बग्गा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि देश में जिस राज्य की विश्वसनीयता होती है, उसे ही इस प्रकार का कर्ज मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘राज्य सरकार की विश्वसनीयता है, इसलिए उसे ऋण मिल रहा है। वह लगातार ऋण चुका भी रही है। इस राशि का उपयोग राज्य सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में कर रही है।’
उन्होंने सवाल किया कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि तेलंगाना और हिमाचल की उसकी सरकारें क्या बगैर कर्ज लिए काम कर रही हैं?
भाषा ब्रजेन्द्र
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