सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणी को लेकर नेपाल की राष्ट्रीय सभा की बैठक स्थगित

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सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणी को लेकर नेपाल की राष्ट्रीय सभा की बैठक स्थगित

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 06:37 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 06:37 PM IST

(शिरीष बी प्रधान)

काठमांडू, तीन जून (भाषा) भारत के साथ सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की टिप्पणी के खिलाफ विपक्षी सांसदों के लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद बुधवार को नेपाली संसद के उच्च सदन ‘राष्ट्रीय सभा’ की बैठक स्थगित कर दी गई।

संसद सचिवालय के अनुसार, राष्ट्रीय सभा के अध्यक्ष नारायण प्रसाद दहल ने सदन की कार्यवाही नौ जून को दोपहर सवा एक बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

लोकप्रिय रूप से ‘बालेन’ के नाम से जाने जाने वाले शाह द्वारा रविवार को भारत के साथ सीमा विवाद को लेकर दिए गए एक बयान के बाद से ही संसद की कार्यवाही में व्यवधान पैदा हो रहा है, जिससे बैठकें स्थगित करनी पड़ रही हैं।

उन्होंने कहा था, ‘केवल भारत ने ही नहीं, बल्कि नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीनों पर अतिक्रमण किया है।’ उनकी इस टिप्पणी से भारी विवाद खड़ा हो गया है।

बालेन ने अपने बयान में विस्तृत जानकारी दिए बिना यह भी सुझाव दिया था कि भारत और नेपाल इस मुद्दे के समाधान के लिए इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेने पर सहमत हुए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के समक्ष भी उठाया है।

इस बीच, भारत ने मंगलवार को नेपाल के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने में किसी भी ‘तीसरे पक्ष’ की भूमिका को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।

बुधवार की तय कार्यसूची के अनुसार, वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले को राष्ट्रीय सभा में चर्चा के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के सरकारी राजस्व और व्यय का अनुमानित बजट प्रस्तुत करना था, लेकिन सदन की बैठक बिना किसी तय कामकाज के ही स्थगित कर दी गई।

इससे पहले मंगलवार को भी विपक्षी दलों द्वारा इस बयान पर शाह से माफी मांगने और इसे वापस लेने तथा संसद के रिकॉर्ड से हटाने की मांग के बाद राष्ट्रीय सभा की बैठक स्थगित कर दी गई थी।

निचले सदन ‘प्रतिनिधि सभा’ को भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शनों के कारण मंगलवार को आठ जून तक के लिए स्थगित कर दिया गया था।

नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है और दोनों देश इन क्षेत्रों पर अपना दावा करते हैं।

भारत का रुख है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा था कि हालांकि ‘भारत-नेपाल सीमा का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा सीमांकित किया जा चुका है, लेकिन कुछ हिस्से अब भी अनसुलझे हैं। गंडक नदी का मार्ग बदलने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है।’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके अलावा, सीमांकित हिस्सों में ‘नो-मैन्स लैंड’ (तटस्थ क्षेत्र) पर सीमा पार से कब्जे और अतिक्रमण के मामले भी सामने आए हैं, जिनका वर्तमान में संयुक्त रूप से नक्शा तैयार किया जा रहा है।’’

भाषा सुमित सुरेश

सुरेश