लाड़ली बहना योजना के अमल में दखल से मप्र उच्च न्यायालय का इनकार, जनहित याचिका खारिज

लाड़ली बहना योजना के अमल में दखल से मप्र उच्च न्यायालय का इनकार, जनहित याचिका खारिज

लाड़ली बहना योजना के अमल में दखल से मप्र उच्च न्यायालय का इनकार, जनहित याचिका खारिज
Modified Date: February 11, 2026 / 08:37 pm IST
Published Date: February 11, 2026 8:37 pm IST

इंदौर, 11 फरवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए संचालित लाड़ली बहना योजना के अमल पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा है कि किसी भी शासकीय योजना के कार्यान्वयन से जुड़े नीतिगत निर्णय सरकार पर निर्भर करते हैं।

उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने रतलाम के पूर्व विधायक पारस सकलेचा की याचिका दोनों पक्षों के तर्कों पर गौर के बाद मंगलवार को खारिज कर दी।

सकलेचा ने याचिका में गुहार लगाई थी कि राज्य सरकार के वादे के मुताबिक लाड़ली बहना योजना की हर हितग्राही को प्रति माह 3,000 रुपये दिए जाएं, नयी हितग्राहियों के पंजीयन शुरू किए जाएं और हितग्राहियों की पात्रता की न्यूनतम उम्र 21 वर्ष के बजाय 18 वर्ष करते हुए उन्हें जीवन पर्यंत योजना का लाभ दिया जाए।

याचिकाकर्ता के वकील ने उच्च न्यायालय में तर्क दिया कि योजना के अब भी जारी रहने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा 20 अगस्त 2023 से नयी हितग्राहियों के पंजीकरण रोके जाने का कदम ‘अवैध, मनमाना और भेदभावपूर्ण’ है।

उधर, राज्य सरकार के वकील ने कहा कि योजना का क्रियान्वयन शासन के नीतिगत निर्णय के मुताबिक किया जा रहा है और योजना के लाभ का दावा करने वाली किसी भी महिला ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए अदालत में याचिका दायर नहीं की है, इसलिए सरकारी नीति की जांच जनहित याचिका के आधार पर नहीं की जा सकती।

खंडपीठ ने सरकार के नीतिगत निर्णयों की न्यायिक समीक्षा के मामलों में अलग-अलग अदालतों के फैसलों का हवाला दिया और पूर्व विधायक की जनहित याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने रेखांकित किया कि किसी नीतिगत निर्णय के अमल की तारीख और उसके जारी रहने का फैसला सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि सकलेचा की जनहित याचिका के आधार पर लाड़ली बहना योजना की हितग्राहियों की मासिक सहायता राशि बढ़ाए जाने की गुहार को लेकर विचार किया जाना न्यायोचित नहीं होगा क्योंकि याचिकाकर्ता न तो इस योजना के हितग्राही हैं, न ही उनकी ओर से इसका लाभ पाने की कोई इच्छा जताई गई है।

लाड़ली बहना योजना सूबे में 2023 के विधानसभा चुनाव से चंद महीने पहले शुरू की गई थी। फिलहाल इस योजना के तहत 1.26 करोड़ से अधिक महिला लाभार्थियों को हर महीने सरकारी खजाने से 1,500-1,500 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

प्रदेश सरकार का कहना है कि वादे के मुताबिक इस योजना की हितग्राहियों को 3,000 रुपये की मासिक रकम 2028 तक मिलनी शुरू हो जाएगी।

विश्लेषकों का मानना है कि सियासी रूप से बेहद संवेदनशील इस योजना ने पिछले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत में अहम भूमिका निभाई थी।

भाषा हर्ष नोमान

नोमान


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