इंदौर (मध्यप्रदेश), 17 फरवरी (भाषा) इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की छात्रा सुषमा प्रदीप मोघे ने इस कहावत को सच साबित कर दिया है कि ‘उम्र सिर्फ एक संख्या है’। उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद 78 वर्ष की उम्र में मराठी के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम की परीक्षा की प्रावीण्य सूची में पहला स्थान हासिल किया है।
मोघे को मंगलवार को आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान मराठी के एम.ए. पाठ्यक्रम की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने पर राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने स्वर्ण पदक से सम्मानित किया।
मोघे ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया,‘‘मुझे पहले नहीं पता था कि मैं इस उम्र में भी मराठी में एम. ए. कर सकती हूं। जब मुझे इस बारे में पता चला, तो मैंने मौके का पूरा फायदा उठाया।’’
उन्होंने कहा कि एम.ए. की पढ़ाई ने उनके जीवन में सेवानिवृत्ति से आए खालीपन को भर दिया।
मोघे ने कहा,‘‘मैं अपने शिक्षकों की शुक्रगुजार हूं। उन्होंने मेरी पूरी मदद की और मुझे ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों तरीकों से पढ़ाया।’’
उन्होंने बताया कि मराठी उनकी मातृभाषा है और वह इन दिनों हिन्दी के मशहूर लेखकों की कृतियों का मराठी में अनुवाद कर रही हैं।
मोघे ने कहा,‘‘मेरा संदेश यही है कि खाली वक्त का सदुपयोग करें और खूब पढ़ें। दुनिया में पढ़ाई के लिए कितना कुछ है।’’
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने पढ़ाई को लेकर 78 वर्षीय महिला के जज्बे की तारीफ की। उन्होंने कहा,‘‘मोघे को एम.ए. पाठ्यक्रम की परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त करने पर स्वर्ण पदक मिलना हमारे विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है।’’
अधिकारियों ने बताया कि दीक्षांत समारोह में दो शोधार्थियों को ‘डी. लिट’ और 220 शोधार्थियों को ‘पीएचडी’ की उपाधि प्रदान की गई। समारोह में अलग-अलग पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को कुल 217 स्वर्ण और रजत पदकों से अलंकृत किया गया।
भाषा हर्ष शफीक
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