CG Dry New List: मदिरा प्रेमियों के लिए खुशखबरी, इस बार होली में खुली रहेंगी शराब की दुकानें! सरकार ने खत्म की मुहर्रम सहित इन तारीखों पर ड्राई डे

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मदिरा प्रेमियों के लिए खुशखबरी, इस बार होली में खुली रहेंगी शराब की दुकानें! Sharab Dukan Open in Holi Festival

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  • Publish Date - February 17, 2026 / 07:24 PM IST,
    Updated On - February 17, 2026 / 07:30 PM IST
HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ में इस बार होली पर शराब की दुकानें खुली रहेंगी।
  • नई आबकारी नीति में होली, मुहर्रम और 30 जनवरी को ड्राई डे सूची से हटाया गया।
  • वर्ष 2026-27 में अब केवल 4 दिन ही ड्राई डे घोषित।

रायपुरः CG Sharab Dukan Band छत्तीसगढ़ के शराब प्रेमियों को इस बार होली में शराब के लिए ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। इस बार होली में शराब की सभी दुकानें खुली रहेंगी। दरअसल, साय सरकार ने नई आबकारी नीति में पहले निर्धारित सात ड्राई डे में से तीन दिन समाप्त कर दी हैं। इनमें होली, मुहर्रम, महात्मा गांधी निर्वाण दिवस (30 जनवरी) भी शामिल है। इन तीन दिनों पर अब राज्य में शराब बिक्री पर प्रतिबंध नहीं रहेगा। बाकी ड्राई डे पहले की तरह ही लागू रहेंगे।

CG Sharab Dukan Band बता दें कि अब तक प्रदेश में होली के साथ-साथ 7 शुष्क दिवस रहता था। शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रखी जाती थी। इतना ही नहीं, होली की पहले शाम पुलिस जगह-जगह चेकिंग करती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होने वाला है। नए नीति के अनुसार साल 2026-27 में सिर्फ 4 दिन ड्राई डे घोषित किए गए हैं। इनमें 26 जनवरी गणतंत्र दिवस, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस, 2 अक्टूबर गांधी जयंती और 18 दिसंबर गुरु घासी दास जयंती शामिल हैं। हालांकि कलेक्टरों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने विवेक के अनुसार शराब दुकानों को लेकर फैसला ले सकते हैं।

30 जनवरी को खुली थी शराब की दुकानें (CG Sharab Dukan Band)

छत्तीसगढ़ में 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर शराब दुकानें खुली रहने के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। कांग्रेसियों ने प्रदेश के अलग-अलग शहर की शराब दुकान के सामने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और नियमों में तत्काल बदलाव की मांग की थी। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि बापू के सिद्धांतों और आदर्शों के विपरीत ऐसे पावन दिन पर शराब दुकान का खुला रहना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी के विचारों और जनभावनाओं का अपमान बताया था।

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