अंतरधार्मिक जोड़ों को दी गई अंतरिम राहत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी मप्र सरकार

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अंतरधार्मिक जोड़ों को दी गई अंतरिम राहत के खिलाफ उच्चतम न्यायालय जाएगी मप्र सरकार

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  • Publish Date - November 20, 2022 / 05:28 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:48 PM IST

जबलपुर (मप्र), 20 नवंबर (भाषा) मध्यप्रदेश सरकार उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख करने जा रही है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना विवाह करने वाले अंतरधार्मिक जोड़ों पर कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है।

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अंतरिम आदेश में राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह अपनी मर्जी से शादी करने वाले वयस्कों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 10 के तहत कार्रवाई नहीं करे।

न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पीसी गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि धारा 10, धर्मांतरण करना चाह रहे एक नागरिक के लिए यह अनिवार्य करता है कि वह इस सिलसिले में एक पूर्व सूचना जिला मजिस्ट्रेट को दे, लेकिन ‘‘हमारे विचार से यह इस अदालत के पूर्व के फैसलों के आलोक में असंवैधानिक है।’’

उच्च न्यायालय के 14 नवंबर के इस आदेश में कहा गया है कि इसलिए प्रतिवादी (राज्य सरकार) अपनी मर्जी से शादी करने वाले वयस्कों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 10 के उल्लंघन को लेकर उसके (अदालत के) अगले आदेश तक दंडात्मक कार्रवाई नहीं करे।

महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने रविवार को पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘राज्य सरकार उच्च न्यायालय के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देने के लिए उच्चतम न्यायालय जा रही है, जिसमें जिला मजिस्ट्रेट को सूचित किए बिना विवाह करने वाले अंतरधार्मिक जोड़ों पर मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 10 के तहत कार्रवाई नहीं करने की बात कही गई है।’’

मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम प्रलोभन, धमकी एवं बलपूर्वक विवाह अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से धर्मांतरण पर रोक लगाता है।

सिंह ने कहा, ‘‘हम जल्द ही उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने जा रहे हैं।’’

खंडपीठ ने मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली सात याचिकाओं के एक समूह पर यह अंतरिम आदेश जारी किया।

याचिकाकर्ताओं ने राज्य को अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को अभियोजित करने से रोकने के लिए अंतरिम राहत प्रदान करने का अनुरोध किया था।

उच्च न्यायालय ने राज्य को याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। खंडपीठ ने इसके बाद, मामले को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

भाषा सं रावत रावत रंजन

रंजन