Narottam Mishra Cry at nomination rally/Image Credit: IBC24.in
Narottam Mishra Cry at nomination rally: भोपाल: ये सिसकी…ये आंसू…ये कसक…ये पीड़ा.. टिकट कटने के बाद से ही अपने अंदर दबाये हुए थे नरोत्तम मिश्रा, लेकिन दतिया प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की नामांकन सभा के दौरान उनके सब्र का बांध फूट पड़ा, यों फूटा कि उनकी आंखें छलछला आईं। मौके पर ही सीएम मोहन, बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और जगदीश देवड़ा ने उन्हें संभाला। वैसे आशुतोष के नामांकन में नरोत्तम समर्थकों के विरोध के बाद सतही तौर पर भले ही डैमेज कंट्रोल नजर आया, लेकिन भाजपा तलहटी के लिए भी कोई जोख़िम नहीं लेना चाहती। यही वज़ह है कि खुद सीएम मोहन ने सरकार की उपलब्धियां और विकास गिनाते हुए कहा कि- नरोत्तम, आपके छोटे भाई आशुतोष को मैं आपको सौंपता हूँ।
इधर कांग्रेस भी पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के साथ घनश्याम सिंह का नामांकन दाखिल कराने पहुंची, (Narottam Mishra Cry at nomination rally) लेकिन कांग्रेस और भाजपा में ये अंतर रहा कि कि – नरोत्तम तो पूरे समय साथ रहे लेकिन कांग्रेस के संभावित नाम अवधेश नायक और राजेन्द्र भारती दोनों ही साथ नहीं दिखे। हालाँकि कांग्रेस दतिया जीतने का दावा कर रही है।
Narottam Mishra Cry at nomination rally: लेकिन सवाल ये कि क्या नरोत्तम समर्थक वाकई प्राणपण से आशुतोष का साथ देंगे? क्या बीजेपी का दिया गया नारा राजा और रंक की लड़ाई लोगों को अपील करेगा? सवाल ये कि – क्या कांग्रेस के असंतुष्ट घनश्याम सिंह के लिए ईमानदार प्रयास करेंगे और सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या दतिया के नतीज़े कांग्रेस और भाजपा दोनों दलों के नेताओं का राजनीतिक भविष्य तय कर देंगे?
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