लखनऊ, 13 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सोमवार को कहा कि केवल संदेह या अनुमान के आधार पर पेट्रोल पंप की डीलरशिप रद्द नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि ऐसा कदम उठाने से पहले तेल विपणन कंपनी को विश्वसनीय वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह साबित करना होगा कि ‘डिस्पेंसिंग यूनिट’ से छेड़छाड़ की गई थी और इसके लिए डीलर जिम्मेदार था।
न्यायमूर्ति इरशाद अली ने यह आदेश मेसर्स सरदार बलदेव सिंह एंड कंपनी की याचिका स्वीकार करते हुए दिया। यह कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की डीलर है और बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में एक खुदरा पेट्रोल पंप का संचालन करती है।
पीठ ने कहा, ‘‘पेट्रोल पंप की डीलरशिप इस अनुमान के आधार पर रद्द कर दी गई कि ‘पल्सर केबल’ पर टेप लगे जोड़ और ‘वेट्स एंड मेजर्स’ (वजन एवं माप) की सील में गड़बड़ी होने से डीलर ने अवश्य छेड़छाड़ की होगी। यह निष्कर्ष उस स्थापित कानूनी सिद्धांत की अनदेखी करता है कि संदेह, चाहे वह कितना भी प्रबल क्यों न हो, साक्ष्य का स्थान नहीं ले सकता।’’
अदालत ने कहा कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को ठोस तकनीकी साक्ष्यों से यह साबित करना चाहिए था कि कथित गड़बड़ियों से ईंधन की आपूर्ति में हेरफेर संभव था और इसके लिए याचिकाकर्ता ही जिम्मेदार था। हालांकि, ऐसा कोई साक्ष्य रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं है।
पीठ ने कहा कि विपणन अनुशासन दिशानिर्देश के तहत डीलरशिप रद्द करने जैसी दंडात्मक कार्रवाई तभी उचित मानी जा सकती है, जब आरोपों की पुष्टि विश्वसनीय तकनीकी साक्ष्यों से हो।
अदालत ने चार जुलाई 2017 को जारी डीलरशिप रद्द करने के आदेश और 15 मई 2018 के अपीलीय आदेश को निरस्त करते हुए इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को छह सप्ताह के भीतर डीलरशिप बहाल करने तथा याचिकाकर्ता को उससे जुड़े सभी लाभ देने का निर्देश दिया।
यह मामला 2017 में हुई एक जांच से जुड़ा है। जांच के दौरान अधिकारियों को एक ‘डिस्पेंसिंग यूनिट’ की ‘पल्सर केबल’ पर टेप लगा जोड़ और दूसरी यूनिट की ‘वेट्स एंड मेजर्स’ सील टूटी हुई मिली थी।
हालांकि, जांच में कोई अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक चिप, अतिरिक्त उपकरण या अन्य संदिग्ध उपकरण नहीं मिला। न ही कम या अधिक ईंधन की आपूर्ति अथवा ईंधन में मिलावट का कोई मामला सामने आया।
अदालत ने यह भी कहा कि कॉरपोरेशन ऐसी कोई वैज्ञानिक या तकनीकी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सका, जिससे यह सिद्ध हो सके कि पल्सर केबल पर लगे जोड़ से ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो सकती थी। केवल केबल में जोड़ या सील के क्षतिग्रस्त होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि डीलर ने छेड़छाड़ की थी।
पीठ ने यह भी पाया कि संबंधित ‘डिस्पेंसिंग यूनिट’ पुरानी थी और पहले किसी अन्य पेट्रोल पंप पर स्थापित थी। जांच के समय वह चालू हालत में भी नहीं थी।
भाषा सं आनन्द खारी
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