मप्र में आदिवासी मुख्यमंत्री के सवाल पर मुंडा ने कहा: इस तरह के निर्णय विधायक दल लेता है
मप्र में आदिवासी मुख्यमंत्री के सवाल पर मुंडा ने कहा: इस तरह के निर्णय विधायक दल लेता है
भोपाल, 25 अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने बुधवार को कहा कि अगर भाजपा मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखती है तो किसी आदिवासी व्यक्ति को मुख्यमंत्री चुना जाएगा या नहीं, इसका निर्णय विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के विधायकों द्वारा लिया जाएगा।
केंद्र सरकार में जनजातीय मामलों के मंत्री मुंडा ने यहां संवाददाता सम्मेलन में इस सवाल के जवाब में यह बात कही कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में सत्ता में बनी रही तो क्या मध्य प्रदेश को अपना पहला आदिवासी मुख्यमंत्री मिलेगा।
मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीट के लिए एक ही चरण में 17 नवंबर को चुनाव होंगे।
मुंडा ने सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘‘ मतदान के बाद, विधानसभा के निर्वाचित सदस्य अपने नेता का चुनाव करते हैं। प्रत्येक राज्य में पार्टी के विधायक यह निर्णय लेते हैं कि मुख्यमंत्री कौन होना चाहिए। भाजपा कभी भी जाति के आधार पर ऐसे मुद्दों पर निर्णय नहीं लेती है, बल्कि यह सुनिश्चित करती है कि बैठक में ऐसे सभी मुद्दों पर चर्चा की जाए।’
मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (एसटी) उम्मीदवारों के लिए कुल 47 सीट आरक्षित हैं, जबकि 35 सीट अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के लिए निर्धारित हैं।
आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों द्वारा उठाए गए कदमों पर प्रकाश डालते हुए मुंडा ने कहा कि पहली बार आदिवासियों के लिए एक अलग मंत्रालय बनाया गया था, जब पार्टी प्रधानमंत्री (स्वर्गीय) अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में केंद्र में सत्ता में थी।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) (पेसा) अधिनियम भी लागू किया, 15 नवंबर को आदिवासी प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा के सम्मान में आदिवासी जनजाति गौरव दिवस घोषित किया, मध्य प्रदेश में 63 एकलव्य स्कूल और 1,083 आश्रम स्कूल खोले जो इस समुदाय के बच्चों को शिक्षा प्रदान करेगें।
कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र, जिसमें उसने आदिवासी समुदाय के कल्याण के लिए वादे किए हैं, को ‘झूठ का पुलिंदा’ करार देते हुए मुंडा ने दावा किया कि कांग्रेस ऐसी चीजों को लागू करने का वादा करती है जिन्हें भाजपा सरकार पहले ही लागू कर चुकी है तथा उनमें पेसा कानून भी शामिल है।
उन्होंने आरोप लगाया, ”कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन किया और सत्ता में बने रहने के लिए उसने सभी तरह के हथकंडे अपनाए, लेकिन वह आदिवासियों के जीवन को बदलने के लिए कुछ भी करने में विफल रही।”
उन्होंने कहा, ‘इसके शासन के तहत, दूर-दराज के आदिवासी क्षेत्र पिछड़े बने रहे और विकास के अभाव में अधिकतम संख्या में आदिवासी लोग अपने मूल स्थान से बाहर चले गए या विस्थापित हो गए।’
भाषा दिमो राजकुमार

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