उमरिया (मध्यप्रदेश), दो फरवरी (भाषा) पुणे के बहुचर्चित ‘पोर्श हिट-एंड-रन’ मामले में खून के सैंपल से छेड़छाड़ में मदद करने के तीन आरोपियों को उच्चतम न्यायालय से जमानत मिलने पर इस दुर्घटना में मारे गए दो इंजीनियरों में से एक अनीश अवधिया के परिजनों ने सोमवार को निराशा जताई और शीर्ष अदालत से जमानत रद्द करने की मांग की।
पुणे के कल्याणी नगर में 19 मई 2024 को हुए इस हादसे में 24 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर अनीश अवधिया और अश्विनी कोष्टा की मौत हो गई थी। अनीश उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली के रहने वाले थे जबकि कोष्टा जबलपुर की रहने वाली थी।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को दुर्घटना के बाद खून के सैंपल से छेड़छाड़ में मदद करने के आरोपी आदित्य सूद, आशीष मित्तल और संतोष गायकवाड़ को यह कहते हुए जमानत दे दी कि वे 18 महीने से जेल में हैं।
मित्तल मुख्य आरोपी के पिता का दोस्त है, जबकि सूद उस लड़के का पिता है जो कार में सवार था। गायकवाड़ एक बिचौलिया है जिसने ब्लड रिपोर्ट में हेरफेर करने के लिए कथित रूप से तीन लाख रुपये की रकम ली थी।
बंबई उच्च न्यायालय ने पिछले साल दिसंबर में उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था।
उच्चतम न्यायालय की ओर से तीनों आरोपियों को जमानत देने के फैसले पर अनीश के परिजनों ने मायूसी जताते हुए आरोप लगाया कि उन्हें न्याय नहीं मिला और इससे समाज में गलत संदेश जा रहा है।
अनीश के दादा आत्माराम अवधिया ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा कि ऐसे मामलों में आरोपियों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए थी।
उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्य आरोपी पूंजीपति परिवार से है, इसलिए उसे बचाने के लिए शुरू से ही फर्जीवाड़े का सहारा लिया गया।
उन्होंने दावा किया कि खून बदलकर और षड्यंत्रपूर्वक इस पूरे मामले को ‘दबाने’ की कोशिश की गई।
भाषा ब्रजेन्द्र राजकुमार
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