Samrat Vikramaditya Mahanatya: 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य,’ वाराणसी के रोम-रोम में बसा अनोखा मंचन, देखें तस्वीरें

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Samrat Vikramaditya Mahanatya: देश की धर्म नगरी 3-5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन-वीरता-साहस की साक्षी रही।

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  • Publish Date - April 6, 2026 / 05:30 PM IST,
    Updated On - April 6, 2026 / 05:30 PM IST

Samrat Vikramaditya Mahanatya/Image Credit: MP DPR

HIGHLIGHTS
  • धर्म नगरी 3-5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन-वीरता-साहस की साक्षी रही।
  • ऐतिहासिक महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' मंचन को 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा।
  • इस महानाट्य के दौरान विशाल और भव्य सेट लगाया गया। ऊंचे-ऊंचे दुर्ग बनाए गए।

Samrat Vikramaditya Mahanatya: भोपाल/वाराणसी: देश की धर्म नगरी 3-5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन-वीरता-साहस की साक्षी रही। यहां मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ऐतिहासिक महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ मंचन को 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा। यह अपने आप में एक रोचक रिकॉर्ड रहा। दर्शक इस महानाट्य की प्रस्तुति देखकर रोमांचित हुए। मंच पर कलाकारों ने उस अतीत और गौरवशाली इतिहास को जीवंत किया, जिसने युगों-युगों तक मानव जाति को स्वतंत्रता और सुशासन के लिए प्रेरित और आंदोलित किया। (Samrat Vikramaditya Mahanatya) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य ने इस महानाट्य का शुभारंभ किया। सीएम डॉ. मोहन ने कहा कि यह अवसर सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से परिचित होने का है।

लगाया गया था विशाल और भव्य सेट

इस महानाट्य के दौरान विशाल और भव्य सेट लगाया गया। ऊंचे-ऊंचे दुर्ग बनाए गए। दर्शक राजसी वैभव को देखकर उत्साह से भर गए। महानाट्य के लाइट इफेक्ट और म्यूजिक ने दृश्यों को सजीव बना दिया। दर्शक सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता देखकर गौरव महसूस करने लगे। (Samrat Vikramaditya Mahanatya) इस महानाट्य में हाथियों-घोड़ों-ऊंटों के काफिलों ने दर्शकों का रोम-रोम रोमांचित कर दिया। हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ो की टापों ने मंच पर रणभूमि का साक्षात दृश्य बना दिया।

दर्शकों की आंखों में आए आंसू

गौरतलब है कि, इस महानाट्य में 200 से ज्यादा कलाकारों ने अभिनय किया। उनका अभिनय देखकर दर्शकों का उत्साह देखते ही बनता था। कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के उन अनछुए पहलुओं को भी दिखाया, जो उन्हें एक साधारण राजा से ‘चक्रवर्ती सम्राट’ बनाते हैं। (Samrat Vikramaditya Mahanatya) दर्शकों ने देखा कि कैसे एक ह्रदय स्पर्शी सम्राट प्रजा का हाल जानने के लिए रात के अंधेरे भेस बदलकर निकलते हैं। कई दृश्य तो ऐसे भी थे, जिन्हें देखकर दर्शको की आंखों में आंसू आ गए। नाटक के अंत में दर्शक “सम्राट विक्रमादित्य की जय” बोलने से खुद को नहीं रोक सके।

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