शिवसेना (उबाठा) विधायक का दावा, बीकेसी के उद्यान का केवल एमएमआरडीए अधिकारी इस्तेमाल कर पा रहे

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शिवसेना (उबाठा) विधायक का दावा, बीकेसी के उद्यान का केवल एमएमआरडीए अधिकारी इस्तेमाल कर पा रहे

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  • Publish Date - May 28, 2026 / 03:27 PM IST,
    Updated On - May 28, 2026 / 03:27 PM IST

मुंबई, 28 मई (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) विधायक वरुण सरदेसाई ने दावा किया है कि मुंबई के बीकेसी इलाके में एक सार्वजनिक उद्यान को एमएमआरडीए अधिकारियों के लिए “निजी एन्क्लेव” में बदल दिया गया है। उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से इसकी जांच का आदेश देने का आग्रह किया है।

सरदेसाई ने फडणवीस को 27 मई को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) की ओर से बीकेसी इलाके में लगभग पांच एकड़ में विकसित “सिटी पार्क” केवल एमएमआरडीए अधिकारियों और उनके परिवारों के लिए ही सुलभ है, जो उस क्षेत्र में स्थित जेटवान स्टाफ क्वार्टर में रहते हैं।

बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से विधायक सरदेसाई ने आरोप लगाया कि उद्यान और वहां मौजूद खेल अवसंरचना के रखरखाव एवं देखभाल के लिए करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि टेनिस कोर्ट और क्रिकेट मैदान समेत उच्चस्तरीय सुविधाएं आम नागरिकों के लिए दुर्गम बनी हुई हैं।

सरदेसाई ने दावा किया कि शहर के प्रमुख व्यापारिक केंद्र में स्थित परिसर के भीतर एमएमआरडीए अधिकारियों के लिए विशेष खेल आयोजन भी आयोजित किए जा रहे थे।

शिवसेना (उबाठा) विधायक ने कहा कि यह “बेहद चिंताजनक” है कि मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण इलाकों में से एक में सार्वजनिक भूमि को कथित तौर पर “कुछ चुनिंदा नौकरशाहों के लिए निजी एन्क्लेव” के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों को खुले स्थानों तक पहुंच से वंचित किया जा रहा है।

सरदेसाई ने राज्य सरकार से उद्यान में लगाए गए कथित प्रतिबंधों की तत्काल उच्च स्तरीय जांच का आदेश देने और जांच लंबित रहने तक जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी मांग की कि उद्यान की परिचालन स्थिति और पहुंच से संबंधित सभी फाइल और निर्णय सार्वजनिक किए जाएं।

विधायक ने उद्यान और वहां विकसित सभी मनोरंजक सुविधाओं तक जनता की निर्बाध पहुंच को तत्काल बहाल करने के साथ-साथ सुविधाओं के रखरखाव एवं विकास पर खर्च किए गए सार्वजनिक धन का ऑडिट कराने की भी मांग की।

भाषा

देवेंद्र पारुल

पारुल