Aadhar Card for Petrol-Diesel: बिना आधार कार्ड नहीं मिलेगा डीजल, सिर्फ 5 लीटर का कोटा किया गया फिक्स, माइक लेकर प्रशासन के अधिकारी कर रहे घोषणा
महाराजगंज: Aadhar Card for Petrol-Diesel पश्चिम एशिया संकट के चलते देश के कई राज्यों में पेट्रोल-डीजल का आभाव देखने को मिल रहा है। पेट्रोल पंप के बाहर ईंधन खरीदने वालों की लंबी कतारें देखने को मिल रही है। दूसरी ओर पिछले 15 दिन के भीतर करीब 8 रुपए तक पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ चुके हैं। हालांकि सरकार की ओर से लगातार ये दावा किया जा रहा है कि देश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्ट स्टॉक है और लोग अफवाहों के चक्कर में पड़कर पेट्रोल-डीजल खरीदने पहुंच रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के महाराजगंज का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें डीजल खरीदने के लिए आधार कार्ड जरूरी किए जाने की बात कही जा रही है।
Aadhar Card for Petrol-Diesel सामने आए वीडियो में आप देख सकते हैं कि पुलिस वैन में सवार पुलिसकर्मी ये घोषणा कर रहे हैं कि किसी को भी 5 लीटर से अधिक तेल नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि ईंधन के लिए आपको आधार कार्ड दिखाना होगा। अगर आधार कार्ड नहीं है तो उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। वहीं, पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही गई है।
दूसरी ओर महाराजगंज से वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस ने भी सरकार पर हमला बोला है। कांग्रेस ने अपने अधिकारिक सोशल मीडिया पर लिखा है कि ‘ये कोई मेला नहीं है- पेट्रोल और डीजल के लिए परेशान आम जनता और किसानों की भीड़ है। तस्वीरें यूपी के महाराजगंज की हैं, जहां पेट्रोल-डीजल के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े हैं, कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने लोगों का जीवन मुश्किलों से भर दिया है। इस सरकार में किसान पहले से ही परेशान है और अब नरेंद्र मोदी ने उसे डीजल के लिए लाइन में खड़ा कर दिया है। लोगों में इतनी नाराजगी है कि वे खुद ही वीडियो बनाकर खोखले सरकारी दावों की पोल खोल रहे हैं। साफ है- BJP सरकार में व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, गवर्नेंस फेल हो चुका है- जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है। नरेंद्र मोदी के पास देश चलाने का कोई विजन नहीं है। उनकी बेतुकी नीतियों ने देश को और पीछे धकेल दिया है।
ये कोई मेला नहीं है- पेट्रोल और डीजल के लिए परेशान आम जनता और किसानों की भीड़ है।
तस्वीरें यूपी के महाराजगंज की हैं, जहां पेट्रोल-डीजल के लिए लोग घंटों लाइन में खड़े हैं, कड़ी धूप में अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं।
पेट्रोल-डीजल की किल्लत ने लोगों का जीवन मुश्किलों से भर दिया… pic.twitter.com/06jNd2kcY5
— Congress (@INCIndia) May 28, 2026
इससे पहले सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में घरेलू मांग पूरी करने के लिए पेट्रोल और डीजल की ‘पर्याप्त से अधिक’ आपूर्ति है और इन ईंधनों की कोई किल्लत नहीं है। इसके साथ ही उसने सब्सिडी वाले खुदरा ईंधन को औद्योगिक उपयोग में लाए जाने पर चेतावनी भी दी। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दुनिया के चौथे बड़े रिफाइनिंग केंद्र भारत में 22 रिफाइनरियों की कुल 25.81 करोड़ टन शोधन क्षमता है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश ने 24.32 करोड़ टन घरेलू खपत के मुकाबले पर्याप्त ईंधन का उत्पादन किया और 6.15 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात भी किया। बयान के मुताबिक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, राज्यों और उद्योग संगठनों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।
मंत्रालय ने कहा कि राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और फिक्की एवं सीआईआई जैसे उद्योग मंडलों के साथ समीक्षा में पेट्रोलियम उत्पादों की जमीन पर कोई किल्लत नहीं पाई गई। मंत्रालय ने कहा कि जहां कहीं आपूर्ति में कमी नजर आ रही है, वह आपूर्ति की समस्या न होकर कीमत के अंतर का फायदा उठाने का नतीजा है। सरकार ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी पर रोजाना करीब 550 करोड़ रुपये का नुकसान उठाकर उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचा रही हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि यह लाभ खुदरा उपभोक्ताओं के लिए है, लेकिन कुछ औद्योगिक खरीदार सस्ती दरों का फायदा उठाने के लिए थोक के बजाय खुदरा बाजार से ईंधन खरीद कर रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर दबाव बन रहा है।