suffering from strange deformity
अभिषेक सिंह सेंगर, छतरपुर:
suffering from strange deformity: छतरपुर के पास के गांव काँटी में एक परिवार रहता है जिसके मुखिया का नाम वृंदावन पटेरिया है। 45 वर्षीय पिता के हाथ और पैरों में लगभग 27 उंगलियां हैं साथ ही उनके तीन बच्चें जिसमें दो बेटियां और एक बेटा शामिल है, उन्हें भी यही विकृति है। यदि कोई पहली बार उनके हाथ और पैर दिखे तो अचरज में पढ़ सकता है, लेकिन अपनी इसी विकृति के साथ यह सब लगभग दो पीढ़ियों से जी रहे हैं। इन सभी को यह विकृति जन्मजात है और पिता के बाद उनकी क्रमशः दो पुत्रियां और एक पुत्र में यह विकृति आर्थिक स्थिति से काफी कमजोर वृंदावन पैतृक संपत्ति से मिली।
लोग उड़ाते हैं मजाक
खेती में अपने परिवार का गुजर बसर करते हैं। मकान भी कच्चा है और उसमें भी काफी समस्या है। टूटी छत से पानी रिश्ता है, लेकिन यह परिवार जैसे तैसे अपना गुजर बसर कर रहा है। समाज और लोगों के द्वारा अजीब व्यवहार के प्रश्न पर यह दबी आवाज में स्वीकार करते हैं कि हां इनका मजाक भी कई बार उड़ाया गया है खास तौर पर जब उनके छोटे बच्चे स्कूल जाते हैं तो कुछ लोग इनका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन गांव के लोग वह उनके साथ ही जो बचपन से हैं इनको पूरी तरह से सहयोग और इनका सपोर्ट करते हैं, लेकिन इन सब की शारीरिक छमता कम है।
suffering from strange deformity वृंदावन की दो बेटियां और एक छोटा बालक है, जिसमें से बड़ी बेटी शादी के लायक हो चुकी है और बीच वाली बेटी दसवीं कक्षा में है। छोटा बेटा चौथी कक्षा का छात्र है और यह दोनों बच्चे रोजाना स्कूल जाते हैं और पढ़ाई में भी अच्छे हैं। बच्चों से जब यह सवाल पूछा गया तो वे कुछ शर्मा से गए, लेकिन पिता ने आप बीती सुनाई और बताया कि कई बार समझ में उन्हें कुछ ऐसी दृष्टि से देखा गया जैसे वो अलग और आसमान्य हो। इस बात की पुष्टि करते हुए उनके बचपन के साथी और गांव के ही रहने वाले गणेश सिंह ने भी कहा कि हमें बचपन से देख रहे हैं और कई बार उनके साथ दुर्व्यवहार भी करने की कोशिश की गई उनकी स्थिति गरीबी श्रेणी में है और अन्य प्रशासन की भी कोई मदद नहीं मिल रही है।