भोपाल: मध्यप्रदेश में सत्ताधारी दल बीजेपी और कांग्रेस में पिछड़ा वर्ग का हितैषी होने की होड़ मची हुई है। एक तरफ OBC वर्ग को 27 फीसदी आरक्षण पर श्रेय की सियासत हो रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार ने पिछड़ा वर्ग के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया है, जिसे लेकर भी बीजेपी और कांग्रेस में जुबानी जंग छिड़ गई है।
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अशोकनगर में रघुवंशी समाज खुद को ओबीसी में शामिल करने के लिए प्रदर्शन कर रहा है। दरअसल इसकी वजह हैं सरकारी नौकरियो में ओबीसी को मिलने वाला आरक्षण, क्योंकि प्रदेश की पूरी राजनीति अब इसके आसपास ही घूम रही है। कांग्रेस का दावा है कि कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने ही ओबीसी की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रामजी महाजन आयोग का गठन किया था। 1994 में दिग्विजय सिंह ने ओबीसी के लिए 14 फीसदी आरक्षण लागू किया था 2003 में दिग्विजय सिह ने ओबीसी आरक्षण बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। कांग्रेस ने 2018 के घोषणा पत्र में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण का वादा किया था जिसे मार्च 2019 में पूरा भी किया गया। जब मामला अदालत में पहुंचा तो कांग्रेस ने वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी और इंदिरा जयसिंह की मदद ली।
कांग्रेस का आरोप है कि 2003 में उमा सरकार के दौरान 27 फीसदी आरक्षण पर स्टे आ गया और 14 साल तक लंबित रहा। मौजूदा सरकार पर कांग्रेस का आरोप है कि ओबीसी आरक्षण पर सरकार का स्टे सिर्फ कुछ कर्मचारियों पर था लेकिन ये सभी विभागों पर लागू कर दिया गया। दरअसल कांग्रेस हर हाल में ओबीसी को अपने साथ रखना चाहती है ताकि आगे के चुनावों में उसे बढ़त हासिल हो सके , यही वजह है बीजेपी सरकार के 27 फीसदी आरक्षण पर भी कांग्रेस को भरोषा नहीं है।
दूसरी तरफ बीजेपी भी इस मुद्दे पर बेहद आक्रमक है। संगठन और सरकार दोनों मोर्चों पर बार बार ये जताने की कोशिश हो रही है कि वो अन्य पिछड़ा वर्ग के सच्चे हितैषी है। पार्टी सबसे बड़ी उपलब्धि पिछले तीनों मुख्यमंत्री इसी वर्ग से बनाने की मिसाल देती है। मोदी सरकार के पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्ज देने को भी अपनी उपलब्धि बताती है। बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस ने जल्दबाजी में ये फैसला किया और तत्कालीन एडवोकेट जनरल एक भी बार अदालत में पेश नहीं हुए। हाल ही में राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में लंबित मामलों को छोड़कर बाकी भर्तियों में 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण भी लागू कर दिया। सरकार की गंभीरता आप इससे ही समझ सकते हैं इस मुद्दे पर खुद मुख्यमंत्री ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वरिष्ठ वकील रविशंकर प्रसाद से मुलाकात की, साथ ही सरकार ने पिछड़ा वर्ग के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन किया।
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इस बीच मध्यप्रदेश में पिछड़ा वर्ग आयोग और पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग को लेकर भी बहस शुरु हो गई है। कमलनाथ सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के तौर पर जे पी धनोपिया की नियुक्ति की थी। बीजेपी की सरकार बनने के बाद धनोपिया को हटा दिया गया था जिस पर वो स्टे ले आए। मामला कोर्ट में विचाराधीन है और इस बीच सरकार ने पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग का गठन कर इसकी जिम्मेदारी पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन का अध्यक्ष बना दिया। जाहिर तौर पर ओबीसी को लेकर दोनों ही पार्टियों के बीच तकरार तेज हैं जिसके नतीजे अगले विधानसभा चुनाव के बाद ही दिखेंगे।
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