बोत्सवाना से लाए गए दो चीते कूनो के खुले जंगल में छोड़े गए
बोत्सवाना से लाए गए दो चीते कूनो के खुले जंगल में छोड़े गए
श्योपुर, 11 मई (भाषा) मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बोत्सवाना से लाए गए दो चीतों की पृथकवास अवधि पूरी होने के बाद सोमवार को उन्हें कूनो राष्ट्रीय उद्यान के खुले जंगल में छोड़ दिया।
एक अधिकारी ने बताया कि इससे ‘प्रोजेक्ट चीता’ को गति मिलेगी और भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ेगा।
उन्होंने बताया कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ का उद्देश्य प्रदेश में विलुप्तप्राय चीता प्रजाति को फिर से स्थापित करना, उनकी संख्या बढ़ाना तथा उन्हें स्वतंत्र रूप से शिकार और विचरण के लिए तैयार करना है।
अधिकारी ने कहा कि फरवरी में बोत्सवाना से कूनो लाए गए नौ चीतों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालने के लिए छोटे बाड़ों में रखा गया था। अब उनकी क्वारंटीन अवधि पूरी हो गई है।
उन्होंने बताया कि इनमें से दो मादा चीतों को सोमवार को कूनो नदी के पास खुले जंगल में छोड़ा गया। चीतों को खुले जंगल में छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री यादव ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण भी किया।
फरवरी में बोत्सवाना से छह मादा और तीन नर सहित कुल नौ चीते कूनो लाए गए थे।
अधिकारी ने बताया कि इन चीतों के आने के बाद भारत में चीतों की कुल संख्या, देश में जन्मे शावकों सहित, बढ़कर 57 हो गई है।
उन्होंने कहा कि यह ‘प्रोजेक्ट चीता’ का तीसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय चरण है। इससे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए थे, जबकि वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो पहुंचे थे।
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना से लाए गए चीते अधिक आनुवंशिक विविधता लेकर आए हैं, जिससे कूनो में उनकी स्वस्थ और टिकाऊ आबादी विकसित करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों ने यह उम्मीद भी जताई है कि ये चीते कूनो के वातावरण में तेजी से घुलमिल जाएंगे।
अधिकारी ने बताया कि ‘क्वारंटीन’ (पृथकवास) और अनुकूलन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुछ चीतों को गांधी सागर और नौरादेही जैसे अन्य अभयारण्यों में स्थानांतरित करने की तैयारी भी की जा रही है।
भाषा सं दिमो वैभव
वैभव

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